फ़ैसले होते नहीं हैं, सिर्फ़ सूरत देख कर, दिल न जोड़ा जाए हरगिज़, ऐश ओ इशरत देख कर, बुत है, आदमक़द सही, तो पूजना क्यों कर उसे, कुछ न सोचा झुक गया बस अपनी चाहत देख कर, ग़ैर से वाबस्ता रहके, कौन रह पाया है ख़ुश, जो हमेशा ही मिला हो, ज़ाती हसरत देख कर, मुस्कुरा के आ गया तो दिल ही रौशन हो गया, हम पिघल के रह गए इक ख़ास क़सरत देख कर, दिल कुशादा था हमारा, उसके जी की क्या ख़बर, सब समझने लग गए हम उसकी फ़ितरत देख कर, उर्मिला माधवफ़ैसले होते नहीं हैं, सिर्फ़ सूरत देख कर, दिल न जोड़ा जाए हरगिज़, ऐश ओ इशरत देख कर, बुत है, आदमक़द सही, तो पूजना क्यों कर उसे, कुछ न सोचा झुक गया बस अपनी चाहत देख कर, ग़ैर से वाबस्ता रहके, कौन रह पाया है ख़ुश, जो हमेशा ही मिला हो, ज़ाती हसरत देख कर, मुस्कुरा के आ गया तो दिल ही रौशन हो गया, हम पिघल के रह गए इक ख़ास क़सरत देख कर, दिल कुशादा था हमारा, उसके जी की क्या ख़बर, सब समझने लग गए हम उसकी फ़ितरत देख कर, उर्मिला माधव