चिलमन दरूं

चिलमन दरूं गिरा के किया आपने गुनाह,
इस बे-अदब अदा का भला क्या करेंगे आह !!,

इन फ़ासलों के साथ ही चलना है गर हमें,
किसकी करेंगे आरज़ू,किसकी तकेंगे राह,

करने से पहले आपने सोचा तो होगा ख़ूब
हरक़त को आफ़रीं है,अदावत की वाह-वाह !!

इसके हुए मआनी के उल्फ़त हुयी तमाम,
अब देखनी है आपकी बदली हुयी निगाह,

हमको किया अमीर भी इफ़रात से जनाब,
रख्खेंगे अब सहेज के ये आह और कराह,
 उर्मिला माधव...

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