जिस्म तो एक है

जिस्म तो एक है लिबास बहुत,
जो भी सजता हो, वो है ख़ास बहुत,

उंसियत राई भर नहीं रहती,
लोग बनते हैं ग़म शनास बहुत,

बेसबब, झूठ-मूठ लफ़्फ़ाज़ी,
हमको आती नहीं है रास बहुत,

तेरी दुनियां को अब धता ही सही,
इससे आने लगी है बास बहुत,

आईना शक़्ल पढ़ता रहता है,
हमने रख्खा है इसको पास बहुत,

ज़िन्दगी बेवफ़ाई करती है,
कौन करता है इससे आस बहुत,
उर्मिला माधव..

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