तेरी याद अभी तक
क्यूँ मुझको सताती है,तेरी याद अभी तक,
आँखों को रुलाती है ,कोई बात अभी तक,
हर रात के हिस्से में,तेरा नाम लिखा है,
वीरान सी आँखों मे हैं,जज़्बात अभी तक,
एक दर्द उभरता है,करवट भी बदलने से,
बिस्तर का सिरहाना है,तेरी बाँह अभी तक,
आजाओ दिल ये मेरा,पुरज़ोर धड़कता है,
ये चीख़ के भरता है,बहुत आह अभी तक,
दुश्वार हुआ जीना,मुझे याद तुम न आओ,
मैं मुब्तिला ए ग़म हूँ,न हूँ शाद अभी तक।। .......उर्मिला माधव..
18.2.2013
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