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Showing posts from January, 2018

मुसलमान तो हो

Tujhko iimaan ki qasam,saahib-e-iimaan to ho, Or kuchh ho ke na ho,haq se musalman to ho :: तुझको ईमां की क़सम,साहिब-ए-ईमान तो हो, और कुछ हो के न हो,हक़ से मुसलमान तो हो, :: Mera daawaa hai asar baat se hota hai zuruur, Or kuchh ho ke na ho,dil se suleman to ho :: मेरा दावा है असर बात से होता है ज़ुरूर और कुछ हो के न हो,दिल से सुलेमान त...

बेख़बर को दे ख़बर

मैं हकीक़त ज़िन्दगी की जानना चाहूं अगर, या ख़बीरू अख्नबिर नी बे-खबर को दे खबर, ढूंढती फिरती हूँ रस्ता जा-ब-जा औ दर-ब-दर, या ख़बीरू अख्नबिर नी बे-खबर को दे खबर, बदगुमानी,बद मिजाज़ी क्यू...

सादगी पर आओगे

वक़्त को तुम क्या अदा दिखलाओगे? हम न कहते थे???बहुत पछताओगे... आख़िरश कब तक रहेगा रंग-ओ-बू, एक दिन तो .....सादगी पर आओगे.... #उर्मिला 30.1.2015...

हुज़ूर

आपने पत्थर उठाया फेंक कर मारा ज़ुरूर, हम ही शर्मिंदा हैं क्यों ये लग नहीं पाया हुज़ूर, ख़ैर जाने दीजिए,ग़म छोड़िये इस बात का, फिर मशक़्क़त कीजिये ऑ फेंकिये फिर बा शऊर, दीजिये इसको मु...

एक मतला दो शेर

Tere chehre pe ek chehra hai, saaf jispe guruur likhkha hai.... kisko hai taab itna shane ki, Ik muqammal hijab achcha hai, :: तेरे चेहरे पे ......एक चेहरा है, साफ़ जिसपे गुरूर लिख्खा है.... :: किसको है ताब इतना सहने की, इक मुक़म्मल हिजाब अच्छा है.. #उर्मिलामाधव.. 29.1.2016

😊😊

husn ka bhi kya meyaari khel hai, Aashiqon ki khoob relam pel hai... Waah waahi loot'ta hai husn khoob, Aql se wo chahe bilkul del hai, :: हुस्न का भी क्या मेयारी खेल है, आशिक़ों की ख़ूब रेलम पेल है.. वाह वाही लूटता है हुस्न ख़ूब, अक़्ल से वो चाहे बिलकुल डेेल है.. #उर्मिलामाधव

साब जी

एक मतला दो शेर .... ------------------- ज़ख्म दिल के छुपालो कहीं सा'ब जी, जो अगर दिल संभालो कहीं सा'ब जी, कुछ मुझे भी बता दो,ग़मों की दवा, गर है हिम्मत चुका लो यहीं सा'ब जी, खूब आंसू ये आहें,ये गम के धुंए, क्...

एक मतला एक शेर

हम किसी तौर मुतास्सिर नहीं होने वाले, तेरी दुनियां में अब हाज़िर नहीं होने वाले, प्यार में शर्त है,दम-ख़म हो जिगर होअपना कोई भी दोस्त तेरी ख़ातिर नहीं होने वाले? उर्मिला माधव 29th ज...

अंतहीन आकाश

अंतहीन आकाश, ऊँचाई नापता हुआ जीवन, साँसें तौलता हुआ जीवन, घर से निकलते हुए, भीड़ में चलते हुए, हर तरह सँभलते हुए, ठोकरों,टक्करों, से सामना, बिना किसी कारण, धिक्करित होते हुए, विस...

विधिवत कार्य किया

विधिवत कार्य किया जीवन ने, जो भी प्रिकृति नियत करती है, व्यक्ति "विशेष"नहीं है इसमें, अनुबंधित जीवन हैं सबके, जीवन भर प्रत्येक व्यक्ति ही, अनुबंधित जीवन जीता है, उर्मिला माध...

खड़े हैं तो ?

आप ओहदे में कुछ बड़े हैं तो ? ख़ास मंज़िल पै ही खड़े हैं तो? गोया तकदीर के सिकंदर हों, पर भी सुरख़ाब के जड़े हैं तो ? हम न माने हैं,और न मानेंगे, अब अगर जिद पै ही अड़े हैं तो ? #उर्मिला 28.1.2015....

क़ुर्बान हो गए

तिरछी नज़र की धार पे क़ुर्बान हो गए, यूँ दिल की खुदकुशी पे पशेमान हो गए, अपने मिजाज़ में तो कभी आशिक़ी न थी, पर ऐसा कुछ हुआ के परेशान हो गए, अंदाज़ अपनी रूह के बस ज्यों के त्यों रहे हम ह...

ग़ज़ल

फिल्बदीह के तह्त कही गई ग़ज़ल---- तीर अब दिल पर चलाना छोड़ दे अपनी खातिर एक ख़ाना छोड़ दे, मैक़दों में आना जाना भूल कर, हंस ज़रा दिल का जलाना छोड़ दे, क्यूँ रहे खुशियों से यूँ महरूम तू, होश म...

एक मतला एक शेर

उसकी हस्ती मुझसे कब ख़ाली रही, मेरे संग संग ....,उसकी दीवाली रही, कोई भी हक़दार उसका कब रहा, बिन मेरे बस उसकी बदहाली रही, उर्मिला माधव, 26.1.2017

ग़ज़ल

2014 में लिखी एक ग़ज़ल--- ये तो ज़ाहिर है,वो बिलकुल बे-वफ़ा है, हाँ मगर दिल का अलहदा फ़लसफ़ा है, क्यूँ किसी इन्सान का शिकवा करूँ मैं, गम मेरी तक़दीर का अव्वल सफ्हा है, बारहा तन्हाइयां हैं,बार...

एक मतला 2 शेर

ज़िन्दगी थक हार कर ही चल रही है आजकल, हर किसीकी शख़्सियत ही खुल रही है आजकल, एक लहज़ा भीड़ जो देखी तो हम घबरा गए, अब बची तन्हाई है सो खल रही है आजकल, दिन निकलते ही उदासी,घिर के आती है सो ...

एक मतला दो शेर

ज़िन्दगी तुझसे मैं नाराज़ भी हो सकती हूँ, ख़ुद-ब-ख़ुद मरने को तैयार भी हो सकती हूँ, चाहे जितना भी निबाहा हो तिरे साथ मगर, एक इनसान हूँ हस्सास भी हो सकती हूँ, दिन निकलते ही जो मैं जिस्...

ग़ज़ल

2014 में कहा गया एक कलाम संभवतः उससे भी पहले---- तारीफ़ करूँ क्या जज़्बे की, बस एक दिन भारत भारत है, क्या खूब खिलौने चाबी से..... चलते हैं बहुत हिक़ारत है, आपस में झगडे करते हैं, गद्दी की खाति...

6 लाइन्स

गहरे ज़ख़्मों पे चोट खाते हैं, अहले दिल यूँ ही मुसकुराते हैं, ग़ुज़रे शामो सहर किसी तरहा, रात होते ही टूट जाते हैं, दर्दे क़ुरबत से रू-ब-रू होकर, चश्मे ग़िरियाँ में डूब जाते है...

ग़ज़ल

कितनी हैरत है गिरा,सब्ज़ शजर देखा है, वक़्त-ए-मुश्किल में बहुत खूब क़हर देखा है, चश्म-ए-गिरियाँ का अँधेरा ही रहा आठ पहर, किस से ये कहते फ़क़त दर्द-ए-जिगर देखा है, यूँ तो नाज़ुक था,यही कहत...

एक मतलाएक शेर

Chuk gaye tum or ham bhi chuk gaye Sab yahin aakar achanak ruk gaye, चुक गए तुम और हम भी चुक गए, सब यहीं आकर अचानक रुक गए, Jo chale tan kar jahan main umr bhar, Rasta chalte hii chalte jhuk gaye, जो चले तन कर जहाँ में उम्र भर, रास्ता चलते ही चलते झुक गए... #उर्मिलामाधव, 23.1.2016

ग़ज़ल

कैसे जीते हैं इधर देख ज़रा घर से निकल, आग पीते हैं इधर देख ज़रा  घर से निकल, तेरी खिड़की जो हर इक शाम कहीं बंद हुई, हाथ रीते हैं  इधर देख ज़रा  घर से निकल, कितने गहरे हैं मेरे ज़ख़्म बड़ी म...

ग़ज़ल

सिर्फ़ हंसने को बहाना चाहती हूँ, मैं कहाँ सबको हंसाना चाहती हूँ, गर उमड़ आए समंदर अश्क़ का, तब मैं तनहाई में जाना चाहती हूँ, ग़ैर के कांधे की तालिब किसलिए, बार अपना ख़ुद उठाना चाहती ...

ग़ज़ल

तनहा खड़ी रही मैं समंदर के बीच में, तूफ़ान मुश्किलों के बवंडर के बीच में, ताने गए जो मेरी शिकस्तों के वास्ते, कम फासले थे मेरे ऑ खंजर के बीच में, ताक़ीद ये हुई थी के हंसना है अब हराम, ...

ग़ज़ल

दिलजले महबूब की बांहों का कोई क्या करे?? ख़ार से लिपटी हुयी राहों का कोई क्या करे?? एक हसरत के लिए..दुनियां नज़र अंदाज़ हो, इस क़दर बहकी हुयी चाहों का कोई क्या करे?? ग़र्क़ हो ऐसी मुहब्बत...

नज़्म

अरबों-खरबों शनास दुनियां, तेरे इलज़ाम से जड़ी दुनियां, तेरी नज़रों में बस पड़ी दुनियां, कौन ख़्वाहिश में किसकी रहता है, किसके रस्ते में है खड़ी दुनियां? चलते-चलते थके हुए से क़दम, रो...

ग़ज़ल

एक जब बिछड़ा है,दूजा आएगा ही, और जो आया है वो भी जाएगा ही, मन न मैला कर मुसफिर, रास्ता है, एक दो ठोकर तो यूँ भी खायेगा ही, उठ भी जा होजा खड़ा पैरों पै अब, चल, अँधेरा और भी गहराएगा ही, क्या ...

चार मिसरे

तुम गीत लिखो मैं प्रीत लिखूं, जीवन की सच्ची रीत लिखूं, बदरा बरसे जब आँगन में, तो कण-कण में संगीत लिखूं , उर्मिला माधव

ग़ज़ल

जाओ मगरूर तुम भी हो जाओ, जाओ और दूर तुम भी हो जाओ, मुफ़्त हलकान जैसे रहते हो, जाओ मशहूर तुम भी हो जाओ, इसमें क्या-क्या मज़ा है,देखोगे? जाओ मजबूर तुम भी हो जाओ, तुमको दिल से दुआएं देती ...

ग़ज़ल

बस जुदा होकर हरासां कर गया, ज़िन्दगी लेकिन चरागां कर गया, जब ये पूछा साथ तो चल पाओगे ? उलझनों में था सो हाँ हाँ कर गया, देखते बनती थी उसकी कश्मकश, मुस्कुराने भर को सामां कर गया, क्...

ग़ज़ल

ज़िंदगी के रास्ते में,सब इधर-उधर गए, आस-पास चल रहे थे वो किधर-किधर गए? ज़लज़लों की धार से,न बच सका कोई कहीं, साथ वाले काफिले भी,सब बिखर बिखर गए, बात ख़ास ये रही कि,उलझनें बनी रहीं, मुश्क...

ग़ज़ल

दिल की खारिश को जुबां पर लाये क्यूँ ? जी नहीं था तो यहाँ तक आये क्यूँ बस तुम्हारी ख़ुद ख़याली है अज़ाब, आ ही पहुंचे हो तो फिर पछताए क्यूँ ? क्यों कोई मानेगा तुमको नाख़ुदा, जान कर ये धो...

ग़ज़ल

एक बार फिर से दिल यही कहना चाहता है। .. मुझको परवाह क्यों नहीं रहती ? लब पे कोई आह क्यों नहीं रहती? कोई इज़हार-ए-इश्क़ करता रहे, दिल में कोई राह क्यों नहीं रहती ? भाते रहते हैं कितने च...

नज़्म

पैगाम आया है,बाहर से, लोग कहते हैं के तुम मर गए हो, मर गए और जल गए, बस एक बार, और मैं ज़िन्दा जली, रोज़ ही जलती हूँ, बिना लकड़ियों की आग में, मेरी छाती में हजारों आग हैं, तानों की,लानतों क...

ग़ज़ल

सायबानों से आसमानों तक, अपना चर्चा रहा ज़ुबानों तक, दश्त-ओ-दहशत से कौन उलझेगा, हमने ख़ुद को रखा मकानों तक, वो तो गरदन हलाक कर देते, बात उलझी रही निशानों तक, हमने वो राह ही बदल डाली, ...

एक मतला एक शेर

सब भूलने को आपने मजबूर कर दिया, इतना दुखाया दिल को बहुत चूर कर दिया, किरचें तमाम जोड़ कर फिर से खड़े हुए, ज़ख्मों ने बढ़के ज़ीस्त को नासूर कर दिया उर्मिला माधव 19.1.2018

एक मतला दो शेर

उसका सर भी कलम किया जाए, जिसको रह-रह के ग़म दिया जाए, गर तगाफुल में रंग भरना हो, सिर्फ़ गर्दन को ख़म किया जाये, जीते जी मारना है उसको ग र, उसपे चर्चा भी कम किया जाए, #उर्मिलामाधव... 18.1.2016

एक मतला दो शेर

प्यार का जाम पियो,ग़र जो पिला दे कोई, इतना एहसास रहे......ग़म न बढ़ा दे कोई... ख़ुद पस-ए-पर्दा रहो, धूल बहुत उड़ती है, अपनी ठोकर से कहीं ख़ाक उड़ा दे कोई, सांस तरतीब से आ जाये के इतना तो रहे, दर्द क...

ग़ज़ल

उसकी समझ में आये क्यूं, मेरे सुकूं की बात, जो वाक़ये को .........वाक़ये से बढ़के ले गया उर्मिला माधव ... 17.1.2017

एक मतला एक शेर

साजिंदे उठा लाये हैं,क्यूं ताम-झाम सब, साँसे तो कह रही हैं,के ऊंचा है बाम अब, कुछ हाशिये लगे हैं,हर इक ज़ीस्त के तईं, पहले मिला है वक़्त से,किसको पयाम कब, उर्मिला माधव

ग़ज़ल

माहपार-ए-दरख्शां बहुत खूब है, प्यार मेरा मगर तुमसे मंसूब है, जानना है ज़रूरी सुनो दीदा वर, बा-वफाई मुहब्बत का उस्लूब है आफरीं-आफरीं मेरा दीवाना पन, लोग कहते हैं वो देखो मज्जूब ...

एक मतला 3 शेर

ज़िन्दगी के वास्ते कुछ इस तरहा कर लीजिये, रंज-ओ-ग़म जो भी मिले सब मुस्कुरा कर लीजिये, ग़ैर पर उंगली उठाने से तो बेहतर है यही, अपनी कारस्तानियों पर तब्सरा कर लीजिये, दिल हथेली पर म...

एक मतला दो शेर

मुहब्बत को निभाने में न जाने खो गया क्या-क्या, जुदाई बाद वो जाने के आख़िर ,हो गया क्या-क्या.. जहाँ वाले मिरी तस्वीर का रुख़ देखते भी क्यूँ, कहाँ ज़ाहिर किया मैंने के मेरा रो गया क्य...

एक मतला एक शेर

ये कोई जिस्म हुआ...ज़ख़्म ज़माने भर के, चार क़दमों ही पे याद आएं ,ठिकाने घर के.. क्या मिलें उनसे न अख़लाक़-ए-मुहब्बत न लिहाज़, जिन के होठों पे महज़, प्यार दिखाने भर के, उर्मिला माधव .. 15.1.2017

ग़ज़ल

अपनी ज़ाती ज़िन्दगी में,बाख़ुदा कोई नहीं, जो भी कुछ थे आप थे बस,दूसरा कोई नहीं, कितने लम्बे रास्ते तनहा किये तय उम्र भर, सबका इस्तकबाल था पर नाख़ुदा कोई नहीं, सब अकेले ही उठाते अपन...

ग़ज़ल

हम जो रिश्तों की आस रखते हैं, यूँ ही उम्मीद ख़ास रखते हैं , जब ये दुनिया बदल गयी है तो, बे-वज्ह दिल उदास रखते हैं, जिनको बस दायरों से निस्बत है, खुद को ही आस पास रखते हैं, वो जो  इंसां ...

ग़ज़ल

जनाब हफ़ीज़ जालंधरी की ज़मीन पर आज की फिल बदीह में कही गई ग़ज़ल------------- ------------------------------------------------------ मुरदार जबसे आदमी की ज़ात हो गई, कुल जिंदगी ही अहले ख़राबात हो गई, हमने जो एक तिफ़्ल को गोदी में क्या लिया, उसक...

एक मतला एक शेर

तुम मुहब्बत क्या करोगे,अय हटो जाओ मियाँ, उलझनों में क्या घिरोगे,..अय हटो जाओ मियाँ, है मुहब्बत की ....अजब ताबीर दुनियां में सुनो, ख़ामख्वह आहें भरोगे.....अय हटो जाओ मियाँ, Tum muhabbat kya karoge,ay hato jaao miyaan, uljhanon men kya ghiroge...

ग़ज़ल

फिल्बदीह में कही गई ग़ज़ल---- सर हमारा जा-ब-जा झुकता न था, हम को कोई आस्तां जंचता न था  किसको आख़िर मोतबर हम मानते, जब के कोई बात पर टिकता न था, हम मसर्रत की दुआ करते रहे, दूर तक उससे कोई र...

ग़ज़ल

मेरे हिस्से के अश्क़ तुम पी लो, और ये ज़िन्दगी भी तुम जी लो.... लोग जब तबसरा करें तुम पर, उससे पहले ही होठ तुम सीं लो  मुझको तमगा मिला रकाबत का, ये भी इलज़ाम सर पे तुम.ही लो, रब ने ये सादगी...

ग़ज़ल

चिलमन दरूं गिरा के किया आपने गुनाह, इस बे-अदब अदा का भला क्या करेंगे आह !!, इन फासलों के साथ ही चलना है गर हमें, किसकी करेंगे आरज़ू,किसकी तकेंगे राह, करने से पहले आपने सोचा तो होगा ख...

नज़्म

A tribute to my husband Madhav ji..on 11th January.. सुबह 5 बजे तक इन्तज़ार और फिर सारी ज़िन्दगी इंतज़ार ..... -------------- जब हुस्न का आलम था,ज़ुल्फ़ों में पेच-ओ-ख़म था, दिल कूचा-ए- जानम था,सर पे न कोई ग़म था, क़दमों तले जहाँ था,बाँहों में आ...

एक मतला एक शेर

सब साथ चल सकेंगे ,वो भी मुग़ालते हैं यादों के सिलसिले हैं,वो भी खंगालते हैं, सूखे शजर के पत्ते,गिरते हैं ख़ुद ब ख़ुद ही, दिल जो धड़क रहा है,वो भी संभालते हैं , उर्मिला माधव

गीत

व्यथा कथा और अंतर्मन, बीत गया पूरा जीवन, मार्ग सतत हम चलते हैं, स्वयं स्वयम को छलते हैं, आते भ्रम जाल समझ सब ही हम फिर भी धंसते जाते हैं, परिचर्या जीवन शैली की, जीवन भर समझ न पाते ...

एक मतला तीन शेर

दिल तो शर्माता है फिर भी,तुम कहो तो प्यार लिख दूँ, और तुम्हारे दिल के आगे,अपने दिल की हार लिख दूँ ? प्यार के इन दायरों में बंध के रहना ....है तो मुश्किल, पर किसी दीवार के कोने में इक इ...