ज़िंदगी में नहीं हो
अभी तक तो इस ज़िंदगी में नहीं हो,
हज़ारों बरस से जहां हो, वहीं हो,
कहां तुमने आकर बताया है हमको,
मेरा दिल ही घर है यहां हो, यहीं हो,
ये दिल है तुम्हारा कभी आके कह दो,
बदन का भी क्या है ये चाहे कहीं हो,
कभी हमसे पूछा भी है तुमने आकर?
नहीं दिख रही हो, क्या ज़िंदा नहीं हो?
उर्मिला माधव
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