इस क़दर माज़ूर मत रख,ऐ दिले बिस्मिल मुझे ज़िन्दगी से दूर मत रख,ख़ालिके आदिल मुझे, ठोकरों के साथ चलना एक दीगर बात है, उम्र भर मजदूर मत रख यार दे मंजिल मुझे, दे दिया साग़र-ऑ मीना,और आज़ाद...
आजकल के लोग कुछ ज़्यादः सयाने हो गये, साल बेशक हो नया पर हम पुराने हो गए रौशनी बारूद की है,चार सू रंग-ए-क़फ़न, आदमी की ज़िन्दगी में कितने ख़ाने हो गए, इक बिखर जाता है,खींचें,ग़र सिरा हम द...
सब तो अपनी कह गए मेरे ज़ेह्न में कुछ न था अब कोई लेता भी क्या जब अंजुमन में कुछ न था, सब की सब शादाब बेलें,सूख कर ,झडती रहीं, हर शजर ख़ाली हुआ ऑ बस चमन में कुछ न था, तेरी बीनाई को ये क्या ...
फ़िर वो मिलने को आएगा शायद, कोई किस्सा सुनाएगा शायद, मुझसे बोला के ठहरो आता हूँ, क़त्ल ही करके जाएगा शायद, पहले तजवीज़ मौत की रख्खी, मर्सिया फ़िर सुनाएगा शायद, अब तआक़ुब में मारा फि...
मैं वो पथ्थर हूँ जिसे तुम तोड़ तो सकते नहीं, और फिर आदत भी अपनी छोड़ तो सकते नहीं, आओ फिर इस आग में तुम डूब जाना सीख लो, खौलते दरिया का रुख़ तुम, मोड़ तो सकते नहीं, तपते सहरा में दहकते र...
किस्सा सुना रहे हैं ये वक़्त-ए-शाम किसका, इस गुफ़्तगू में आख़िर उट्ठा है नाम किसका, नामा निगार बनके आया है आज क़ासिद, लाया है देखो ख़त में,किसको सलाम किसका, नीलाम हो रहे हैं जज़्बात ह...
एक प्रयास हिंदी में, ------------------- मन हुआ अनमना तो,भजन कर लिया, लेके गंगा का जल आचमन कर लिया, बैठे आसन पे भी पालथी मार कर, जग के हर देवता को नमन कर लिया, जाने कितनी तरह से किया कीर्तन, अपने हा...
ये अदावत चल रही भगवान से.....ईमान से, लेना-देना कुछ नहीं इनसान से ....ईमान से, हाँ क़दम बोसी नहीं करते किसीकी भी कभी, ज़िन्दगी हमने गुजारी शान से ....ईमान से, जाने क्या-क्या रंग दिखलाए ज़मान...
Mujh pe bas qabiz hua hi chahti hai, ek shai ab silsila hii chahti hai, main khari utrun abas ummid par, wo mera hardam bura hi chahti hai, main kade fikron se guzrun,raat din, apne haq main bas duaa hii chahti hai, main guzarti hun,hazaaron tanz se, zakhhm dil ka wo chhua hi chahti hai, maine bhi baazi rakhi us ziist par, khelna jo bas juaa hii chahti hai... #उर्मिलामाधव... 27.12.2015
दिल में सब्र-ओ-क़रार ..कम ही सही, जज़्बा-ए-इख़्तियार ......कम ही सही, उस पे दामन में तार .....कम ही सही, गुल-ओ-चमन-ओ-बहार कम ही सही शुक्र है फ़िक्र तेरे बिन तो हूँ, ख़ूब है ख़ुद से मुत्मइन तो हूँ... उर्म...
दुनियाँ से कुछ मिला भी नहीं...आपकी क़सम, और हमको कुछ गिला भी नहीं,आपकी क़सम, हम उम्र भर निभाया किये...मुश्किलों के साथ, और इसका कुछ सिला भी नहीं,आपकी क़सम, किस दरज़ा हम जगाते रहे.....कम नसी...
ये मेरी हस्ती है और मैं हूँ जनाब, आपके कहने से होगी क्यूँ ख़राब, देख कर ऐब-ओ-हुनर इनसान के, क्या बजाते फिरते हो ये मुंह जनाब, मैं भी ग़र कहने पे जो आ जाऊं तो, आप क्या दे पायेंगे मुझको ...
Madhuvan Rishiraj की लिखी हुई अद्भुत ग़ज़ल... बस शहीद ही मर के खुश हैं बाकी सब तो डर के खुश हैं हाय ज़माना कैसा आया... कातिल दुनिया भर के खुश हैं कोई बात जो इनकी सुन ले शायर मुजरा करके खुश हैं फौजी सर...
उसी जुस्तजू में जिए जा रहे हैं, जो कह कर गए थे के ले जा रहे हैं, हमीं ने तो इज्ज़त भी बख्शी थी उनको, वही वार हम पर किये जा रहे हैं, कभी कितने ख़ुश थे,मगर आज बोले, ज़ह्र ज़ीस्त है और पिए जा र...
दुश्मनी का तज़किरा हम क्या करें, बढ़ चुका ये मसअला, कम क्या करें, जो हुआ है वो ही तो होना था बस, इसके ऊपर अब भला ग़म क्या करें, गम की दुनियां और ये रंग-ए-मौसिक़ी, उड़ना है तो हौसला कम क्या ...
क्यूँ दिखाता है भला इतनी अदा ये ?? कौनसी दुनियाँ मैं रहता है खुदा ये ?? कोई मरता है तो मरता जा रहा है, चाहे जितना मौत से घबरा रहा है, अहमियत अपनी महज दिखला रहा है, दिल जिगर पे चोट करत...
वो जो खुद को खुदा समझते हैं, ज़ीस्त को मयक़दा समझते हैं सारी दुनिया नशे में गाफिल है, बात ये तयशुदा समझते हैं , कौन बिखरा हुआ है भीतर में, इसको बस ग़मज़दा समझते हैं, तोड़ देते हैं दिल ...
साथ मगरमच्छों के मुझको रहना है, बैर भी इनका मेरे दिल को सहना है, जीवन भर ......मैदान नहीं छोड़ा मैने, अब क्या छोडूं,इतना ही तो कहना है...... उर्मिला माधव.. 21.12.2016
मैंने सोचा ही नहीं हिन्दू या मुसलमां होकर, दिल-ए-हस्सास मेरा निकला फ़क़त हां होकर, एक मज़लूम था बच्चा जो मेरी बाँहों में, और सब भूल गई सोच फ़क़त मां होकर, मेरे नज़दीक जो आया था गोल टोप...
हमें प्यार उससे हुआ जा रहा था, जो मेले में लफ़्ज़-ए-दुआ गा रहा था, हुआ मुब्तिला उसमें हर कोई ऐसे, के आंखों से उसको छुआ जा रहा था, उर्मिला माधव 21.12.2017
यादें, कभी सुनहरी नहीं हो सकतीं, हम याद करते हैं उनको,जो, ज़िन्दगी की राहों में बिछुड़ गए, लौटेंगे नहीं दोबारा,हरगिज़, वो पल सुनहरे कैसे हो सकते हैं !! याद आते हैं वो, जो बहुत दूर हैं, ...
मैं ज़मीन पर खड़ी हूँ, किसी आसमान जैसी, ये वो फ़र्क़ है कि जिसमें कोई फ़ासला नहीं है मैं जहां से देखती हूँ, वहां आ सका न कोई, ये वो जुरअतें है जिनका, तुम्हें हौसला नहीं है, उर्मिला माधव ...
जा तुझे अय ज़िन्दगी अब हर नफ़स ठुकरा दिया, अपने हाथों हमने अपने वक़्त को चलता किया, हर क़दम पर आबलों के नाम लिख्खे हैं अभी, ज़ेह्न से एक आह निकली उसमें सब दफना दिया, ख़ुद तमाशा कर दिया,...
हादसे सुब्ह-ओ-शाम होते हैं, रोज़.....रिश्ते तमाम होते हैं, अपने अखलाक़ पे,नज़र ही नहीं, दाग़........लोगों के नाम होते हैं, जो भी चाहा जुबां से कह डाला, और तब क़त्ल-ए-आम होते हैं, ये जो मजमा लगाया ...
सख़्त दिल को कूट कर कच्चा किया, बोझ दिल का कम अज कम हल्का किया, चाह कर भी रो नहीं पाते थे हम, चश्म-ए-गिरया के लिए रस्ता किया, एक ये एहसान भी कुछ कम नहीं, हर क़दम पर ग़म मेरा रुसवा किया, दि...
दिल किसी ग़म से पुर असर ही नहीं, दुनियां वालों का हमको डर ही नहीं, पहरा देते हैं अब ये शम्स-ओ-क़मर, इस ज़माने को ये ख़बर ही नहीं, सब के सब पर भी काट सकते थे, बेबसी उन की हमको पर ही नहीं, अप...
तू मुहब्बत से हमें महरूम कर जो जाएगा, खूब तनहा रोयेगा,और बे-वफ़ा कहलायेगा, इतने सारे बेबसी के दाग दिल पे होंगे तब, आंसुओं से धोते-धोते,आप ही थक जाएगा, गुफ्तगू के हर्फ जब-जब याद तु...
दश्त जब हो ही गया मेरा कलेजा क्या करूँ, वहशतें या हसरतें जो भी हैं लेजा, क्या करूँ , दिल हथेली पै रखा और साथ में इक ख़त दिया, कुछ नहीं बाकी बचा है क्यों ये भेजा, क्या करूँ, हर घड़ी हलक...
दश्त जब हो ही गया मेरा कलेजा क्या करूँ, उम्र भर तो मैंने तनहा ,ग़म सहेजा, क्या करूँ, Dasht jab ho hi gayaa mera kaleja,kya karun, Umr bhar to maine,tanha,gam saheja, kya karun, दिल हथेली पै रखा और साथ में इक ख़त दिया, कुछ नहीं बाकी बचा है क्यों ये भेजा, क्या क...
कड़े फिकरे कोई कह कर, चला जाता था जो अक्सर, तग़ाफ़ुल उसकी नज़रों में, कभी देखा था जो मैंने, वो मुझको याद आता है।। ज़मीं जब ज़ख़्म धोती थी, फ़लक़ रह-रह के रोता था , कहीं तन्हाई में जाकर, कोई दा...
चूं-चूं का मुरब्बा...😊😊😊 अपने ही ढर्रे पे जीना सीखो यार, वरना जितना चाहो उतना झींको यार, आसमान पर उड़ते ही तो रहते हो, नीचे भी तो कभी-कभी तुम दीखो यार, के हो गयो, क्यूँ थारी जुल्फां...
अदब अब सभी के दफ़ा हो गए हैं, बुज़ुर्गाने आला ख़फा हो गए है समेटे नहीं जा सके दिल के टुकड़े, ये हिस्से भी कितनी दफ़ा हो गए हैं, सिखाई मुहब्बत-ऑ-तहज़ीब जिनको, जवां क्या हुए,........बे-वफ़ा हो गए ...
वक़्त आया,ज़िंदगी की तर्जुमानी लिख गया, कोई आया मेरे दिल पे पानी-पानी लिख गया, उम्र भर हम इक समंदर थाम कर चलते रहे, दुश्मन-ए-जां आंसुओं की एक रवानी लिख गया.. उर्मिला माधव.. 14.12.2016
इस जहाँ की भीड़ में कितने अकेले हो गए हम, जब हुजूम-ए-शिरक़तों में जाके मेले हो गए हम, मुस्कुरा के हाथ उठाए और किया तस्लीम अर्ज़, दिल बिलख के रो गया तो फिर धकेले हो गए हम, उर्मिला माधव,...
उम्र भर जिसकी हिफाज़त दिल ने की, ख़ार की मानिंद .......क्यों चुभता रहा !!!!! दिल हमारा बे-अदब था .....क्या कहें, बे-वफ़ा की सम्त ही ......झुकता रहा.. उर्मिला माधव.... 13.12.2014....
आँखों में जागता है,रातें उधार लेकर, सहरा को नापता है,आँखें उधार लेकर, दस्तार में छुपी है,शायद वो अक़्ल होगी, दुनियां को आंकता है,बातें उधार लेकर, खोया हुआ है इंसां, फितरत की तीर...
वो सुनें जो दुश्मनी का हाथ में परचम लिए हों, वो सुनें जो हर क़दम पर ख़ासकर दम ख़म लिए हों, हम कभी के थक चुके हैं, पूरी दुनियां नाप कर अब, वो सुनें पहलू में अपने जो महज़ हम दम लिए हों जीत...
इबादत से अगरचे हम.....बहुत मंसूब होजाएं, तो लाज़िम है ज़माने की नज़र में खूब हो जाएं, किसी दिल में क़दम रखना भी कार-ए-पुख्ता कारा है, ज़रा नज़र-ए-इनायत हो......कि बस महबूब हो जाएं, हज़ारों जान स...
जो अहले ज़र्फ़ हैं वो सोच के रखते हैं क़दम, वगरना हैफ़ से इनसान को तकते हैं क़दम, अभी भी वक़्त है इनसान ख़ुद संभल जाए, कभी तो राह में हर हाल में थकते हैं क़दम... उर्मिला माधव 11.12.2017
जलते लफ़्ज़ों से बहुत ख़ूब सिला देता था, हाँ मगर ये है...मुझे रब से मिला देता था, उसकी चाहत में बहुत दूर तलक जाती थी, वो मुझे ज़ह्र-ए-जुबां दिल से पिला देता था, मैं तो बस ये के .....तग़ाफ़ुल को ...
दिल को भाती है बहुत,गुल-ओ-चमन की खुश्बू सबसे आला है मगर पाक़ ज़ेहन की ख़ुशबू ये जुबां कुछ भी कहे,साफ़ नज़र आता है, सबकी चाहत है फ़क़त,चैन-ओ-अमन की खुश्बू, वो मिला आज मुझे,यूँ ही अबस कहने ल...
किसीको किसी से मुहब्बत नहीं है, दिखावा है प्यारे हक़ीक़त नहीं है, बिना बात ख़ुद को न हलकान करना, किसी भी मरासिम की क़ीमत नहीं है.. हमीं मुस्कुरा कर गले पड़ रहे थे, जहां में किसी की ये आ...
आपसे जब ये मुकाबिल हो गई, जिंदगानी और मुश्किल हो गई, चुपके-चुपके रोना,कहना कुछ नहीं, एक नई ख़ूबी ये हासिल हो गई, किस तरह तय होंगी इतनी दूरियां, चलते-चलते रूह बिस्मिल हो गई, आपकी हो...
आँख के नीचे की काली झाइयां, और सारी उम्र की तन्हाईयाँ घेरती हैं अब सवालों से मुझे, आज गुज़रे वक़्त की परछाईयाँ, यूँ भी कहते ही नहीं बनता है कुछ, जब ये मुझमें खोजें हैं रानाईयाँ, ज...
ज़ख़्म ताज़ा ही है,भरा तो नहीं, हादसा ये भी कुछ नया तो नहीं, दिल को आदत है,याद रखने की, आपसे फिर भी कुछ कहा तो नहीं, चश्म-ए-गिरयां ने आँख धो डाली, क्या हुआ इसमें कुछ गया तो नहीं, जो भी हो ...
ज़ख़्म सींना मेरा नसीब है क्या ? तेरी दुनियां कोई सलीब है क्या? मेरी आवाज़ जब लरजती है पूछते हैं कोई अदीब है क्या? सांस क्यों ज़िन्दगी पे भारी है, ज़िन्दगी मौत के क़रीब है क्या? तूने त...
जब दर्द से मुक़ाबिल होते हैं हम बहुत, सब लोग सोचते हैं,रोते हैं हम बहुत, अपना चलन हमेशा कुछ ख़ास ही रहा है, महफ़िल के बीच हंसकर,खोते हैं हम बहुत, साँसें जो मिल गई हैं,पूरी तो करनी हों...
पैदा किया है आलमे तनहाई ख़ुद बख़ुद, देखी है हमने वहशते रुसवाई ख़ुद बख़ुद जो-जो हुआ है वो ही तो होना था दोस्तो, जब ज़िन्दगी के हो गए शैदाई ख़ुद बख़ुद, इक फ़ासले के साथ ही चलने की ज़िद हुई, म...
पंछियों के रूप से,ऑ हर सुबह की धूप से, कोयल की मीठी कूक से,दिल में उठती हूक से, हैरान हूँ !! हैरान हूँ !! दिल में छुपी कटार से दुनियाँ की मीठी मार से, पत्थर पै चढ़ते हार से,हो क़रम की गु...
जब बहुत सोचा, निभाने के लिए, दिल ने चाहा, पास जाने के लिए, फ़ासले थे दरमियां, कुछ इस क़दर, जो मिटाने पर भी, मिट पाये नहीं, जागती रातें कसक में, हो गईं तब्दील,जब, हर कराहट,चीखती सी रह गई, ...