पहले से ख़्वाब हमने
पहले से ख़्वाब हमने ज़्यादा हसीन देखा,
जब धड़कनों को अपनी ताज़ा तरीन देखा,
मुश्किल हुआ समझना,क्या ज़ेहन में लिखा है,
जब शख्सियत को इतना ज़्यादः ज़हीन देखा,
बारीकियां समझना,आसान तो नहीं था,
जिस्म-ओ- जिगर पे होता चर्चा महीन देखा,
कोई अहमियत न देखी जज़्बात की जहां में,
हर लम्हा ज़िन्दगी को ,ऐसा मशीन देखा,
हैरत में हर कोई था ये देख कर यक़ायक,
मेहताब को ज़मी पर, परदा नशीन देखा,
उर्मिला माधव,
30.6.2017
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