आईना हूं देख लो
ख़ुद ही सूरत,ख़ुद-ब-ख़ुद ही आईना हूँ देख लो,
ख़ुद रुबाई खुद-ब-ख़ुद हम्द-ओ-सना हूँ देख लो,
पाक़-ओ-ताहिर दिल ये मेरा ग़ैर का तालिब नहीं,
ख़ुद मुहब्बत ख़ुद-ब-ख़ुद ही आशना हूँ देख लो,
ख़ुद-ब-खुद दीवानगी हूँ,होश भी हूँ,ख़ुद-ब-खुद
ख़ुद तग़ाफ़ुल ख़ुद-ब-ख़ुद ही मैं अना हूँ देख लो,
उड़ नहीं सकता है मेरे ख़ूबरू हाथों का रंग,
ख़ुद ही रंगत,ख़ुद-ब-ख़ुद ही मैं हिना हूँ देख लो,
मुश्किलें भी ख़ुद ही आकर मुझ में पिन्हाँ हो गईं,
ख़ुद हिफाज़त ख़ुद-ब-ख़ुद ही मैं फ़ना हूँ देख लो,
उर्मिला माधव...
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