अज़्म नहीं
समझा था मैंने अज़्म है और आफ़ताब है,
तू आया मेरे दिल को लगा इंक़लाब है
किस तरहा तोड़ डाला तुझे इल्म ही नहीं,
आंखों में अश्क़ दिल भी मिरा आब–आब है,
खुर्शीद बनके चमके मिरे दिल की चाह थी
तेरा बयान हद है, शबाब ओ शराब है...
मेरी दुआ है तेरे लिए उस जगह ठहर,
तू आज जिस जगह है बहुत कामयाब है,
उसके तईं भी सोच जिसे चाहता है तू,
क्या साथ देगा तेरा, कहां सेहत्याब है..
उर्मिला माधव
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