हम तो कितनी बार गए हैं

हम तो कितनी बार गए हैं, उसके घर के दरवाज़े तक,
वो ही कभी न आया फिर के अपने किये हुए वादे तक..

दर्द में पिन्हा होकर भी बस खामोशी से देखा सब कुछ,
ख़ुद को हमने क़सम दिलाई, नहीं टूटना ग़म साधे तक..
उर्मिला माधव

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