मेरी आदत से अनजान

मेरी आदत से अनजान,
यार बुरा माने तो मान,

अच्छा बुरा,समझना सीख,
वरना तेरी तू ही जान,

कच्ची गोली खेला है क्या?
हुई नहीं अब तक पहचान?

तुझको अक़्ल नहीं जो अपनी,
आ हम से लेले नादान,

कौन सफ़ाई दे ऑ क्योंकर?
बड़का बनता है भगवान...
उर्मिला माधव

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