कितनी सारी गहमा गहमी

एक मतला तीन शेर,
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कितनी सारी गहमा-गहमी हाय दैय्या,
दुनिया कैसी सहमी-सहमी हाय दैय्या,

प्यार कहाँ पर मिलता है,इस मेले में,
सबकी आँखों में बे-रहमी हाय दैय्या,

जब हमने पहचाना,सबको ठीक नहीं,
क्यूँ हम पालें ये ख़ुशफ़हमी,हाय दैय्या,

क्या पहचान बताऊँ सबको दुनिया की,
सबकी आँखें लगती बहमी,हाय दैय्या,
उर्मिला माधव...
12.2.2014....

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