किससे कितनी कहां निभानी है
किससे,कितनी,कहाँ निभानी है,
फ़िक़्र क्या,ज़ीस्त आनी-जानी है,
ये तो रिश्ते हैं, .....ग़म गुसारी के,
इसमें दुनियां .....कहाँ सुहानी है?
तुम समझते हो हम ही नादाँ है?
दिल ....तजुर्बों की राजधानी है
जितनी निभनी थी निभ गई हमसे,
अब ये ........गुज़री हुई कहानी है,
ज़िन्दगी हमसे सिर्फ़ वाबस्ता,
ये समझना भी बे मआनी है...
उर्मिला माधव।।।
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