घर लूट ले गए
चुपके से आए,जान-ओ-जिगर लूट ले गए, हमको बताया तक नहीं घर लूट ले गए , किसको बताएं हाल ऐसी बेबसी का उफ़, जीना मुहाल,शाम-ओ-सहर लूट ले गए, जो मुन्तजिर रहें तो भला क्या रहें कहो, हम उम्र भर चले वो सफ़र लूट ले गए, ख़ामा खयालियों में रहे दोस्त सब के सब, चर्चा हमारा था वो असर लूट ले गए, जो तर्ज़ कोई बन सकी तो काफ़िया गलत, वो ज़िन्दगी बे-खौफ़-ओ-ख़तर लूट ले गए... उर्मिला माधव...