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घर लूट ले गए

चुपके से आए,जान-ओ-जिगर लूट ले गए,  हमको बताया तक नहीं घर लूट ले गए , किसको बताएं हाल ऐसी बेबसी का उफ़,  जीना मुहाल,शाम-ओ-सहर लूट ले गए, जो मुन्तजिर रहें तो भला क्या रहें कहो,  हम उम्र भर चले वो सफ़र लूट ले गए,  ख़ामा खयालियों में रहे दोस्त सब के सब,  चर्चा हमारा था वो असर लूट ले गए, जो तर्ज़ कोई बन सकी तो काफ़िया गलत,  वो ज़िन्दगी बे-खौफ़-ओ-ख़तर लूट ले गए... उर्मिला माधव... 

नीरव जंगल

नीरव जंगल,नदी मौन है , कौन है? जो क्रंदन करता है? निष्ठा के दर्पण डोले हैं, किसके भाव कहाँ तोले हैं, मौन धरा है,मौन गगन है, दूर कहीं कोई स्वर उभरा है, आज बहुत बेचैन है धरती, बादल जो पानी बरसाए, जुगनूं का पहरा टल जाये, #उर्मिलामाधव... 25.5.2015

कल रात तुम कहां थे

मैं तुमको ढूंढती थी,कल रात तुम कहाँ थे? आँखों में दम नही था,जज़्बात बस रवां थे, कुछ हौसला बढाकर देखा जो आसमां को, महताब कह रहा था तुम उसके रहनुमां थे, रह-रह के बिजलियाँ सी,कौंधा करीं सहन में, बेताब जुगनुओं के अरमान सब जवां थे, एक अक्स चांदनी का पानी पै पड़ रहा था, ख़ामोश आँधियों के आसार सब निहाँ थे, क़ुदरत की दुश्मनी है,कितनी उधार रातें, सागर बता रहा था तुम उससे आशनां थे, काग़ज़ की नाव लेकर इस पार मैं खड़ी थी. आँखों की कोर नम थी,उस पार तुम वहां थे..... #उर्मिलामाधव.. 25.5.2015..

दुहाई दस्तार की

वो कि जिनको थी ज़रूरत प्यार की, क्यों दुहाई दे गए दस्तार की... तितलियों के रंग दिखला कर हमें, बस मिटाते हैं खिजालत हार की, हम से बढ़कर कौन जाना है उन्हें, दास्तां क्या है दिले बीमार की. बस अना के नाम पर ही मिट गए, दिल में लेकर हसरतें दीदार की. उर्मिला माधव

परदा किया कीजिये

थोड़ा परदा किया कीजिये, तौबा-तौबा हया कीजिये, हम हैं ख्वाहिश अगर आपकी, दिल पै दस्तक दिया कीजिये, हैं अदीबों की हम ज़ात में, कुछ क़दम हौसला कीजिये , लोग देंगे भी क्या आपको, हमसे ही इल्तिजा कीजिये, मुफ़्त बदनाम होने से क्या, हमको सजदा किया कीजिये, उम्र भर क्या है हमने किया, सबसे चर्चा किया कीजिये, हमने मुड़ के न देखा कभी, आप माने न क्या कीजिये, वक़्त का ये तकाज़ा है अब, अपनी इज़्ज़त बचा लीजिए.. सबकी इज़्ज़त किया कीजिये.. उर्मिला माधव... 24.5.2014..

दस्तार की

वो के जिनको थी ज़रूरत प्यार की, क्यों दुहाई दे गए दस्तार की... तितलियों के रंग दिखला कर हमें, बस .मिटाते हैं वो खजलत हार की, हम से बढ़कर कौन जाना है उन्हें, दास्तां क्या है दिले बीमार की. बस अना के नाम पर ही मिट गए, दिल में लेकर हसरतें दीदार की. उर्मिला माधव 24.5.2015

अपनों के सितम

अपनों के सितम देख के दिल रूठ गया है, बेहद सताया जा चुका दिल टूट गया है....  जिसकी तलब में आ गई हूँ तेरे दर तलक, उसके ही ज़ेरे पाँव ये दिल छूट गया है, उर्मिला माधव