नज़्म

आपकी दुनिया कली में फूल में सिमटी हुई है,
हम तुम्हारी ज़िंदगी की राह से बिल्कुल अलग हैं,
लफ़्ज़ तो ये एक ही है तुम मुहब्बत कह रहे हो,
हम मगर इसको इबादत सोच कर ही चल रहे हैं,
इसलिए सब ख़ाब अपने तिश्नगी में ढल रहे हैं,
हम अदाओं की अदा से दूर कब के हो चुके हैं,
दिल की उरियानी का हमको शौक़ ही बाक़ी नहीं,
जो भी इसको जिस तरह चाहे समझ ले मान ले ..
उर्मिला माधव 

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