हरगिज़ सिला नहीं है
ऐसे नहीं है हरगिज ये दिल हिला नहीं है
तेरी पुकार सुन कर ये दिल हिला नहीं है
देखा नहीं ख़ुदा ने मुझको कभी तड़पते,
वो जो मेरी ज़िंदगी है मुझसे मिला नहीं है,
वो छीनता रहा है मुझसे हज़ार नेमत,
सब कुछ किया गवारा, उससे गिला नहीं है..
ये दिल भरा हुआ है तकलीफ़ की रिदा से,
रातों के जागने का ये तो सिला नहीं है,
खामोश तो हैं लेकिन तुझमें ही मुब्तिला हैं
ये बात बस दिगर है कोई सिलसिला नहीं है
उर्मिला माधव
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