दो मिनट की ये ग़ज़ल
दो मिनट की ये ग़ज़ल है क्या बताएं,
आप सब बढ़िया कहें, हम मुस्कुराएँ,
जो भी है जैसा भी है कुछ तो लिखा है,
कुछ नहीं लिख्खें तो कैसे दिल लगाएं?
गम लिखें,खुशियाँ लिखें कुछ भी लिखेँ पर,
बात अपनी जब लिखेँ, सब को पढायेँ ।
आप सब भी दोस्त हैं तो सोचना क्या,
अपने ग़म में आपकी हों संग दुआयें,
ख़ास अपनी दास्ताँ कुछ है नहीं बस,
इसलिए हम सोचते हैं क्या छुपायें.....
उर्मिला माधव....
10.9.2014..
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