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Showing posts from October, 2018

आदिल की थी

तीरगी में चल रहे थे रौशनी बस दिल की थी आँधियों का सामना था,इक ख़ुशी मंज़िल की थी जब के मेरे दिल के टुकड़े चार सू बिखरे रहे, लोग ये कहते रहे ये चाल किस आदिल की थी उर्मिला माधव... 31.3.2014...

नज़्म--चूड़ियां

यादें---- रात भर मेरे मुहल्ले में अजब सा शोर था, यूँ लगा जैसे किसीकी चूड़ियों पर ज़ोर था, हाथ डाले हाथ में आपस में बातें कर रहे थे, एक घटिया रस्म को अंजाम देते डर रहे थे, कल सवेरे चूड़ि...

काली झाइयां

आँख के नीचे की काली झाइयां, और सारी उम्र की तन्हाईयाँ घेरती हैं अब सवालों से मुझे, आज गुज़रे वक़्त की परछाईयाँ, यूँ भी कहते ही नहीं बनता है कुछ,  जब ये मुझमें खोजें हैं रानाईयाँ, ...

समझाओ न

एक मतला एक शेर.... किस तरह तुमसे कहूँ आजाओ ना, नईं समझती हूँ मुझे समझाओ ना, बात तक मेरी  नहीं सुनते हो तुम, अब नहीं बोलूंगी तुम से जाओ ना, उर्मिला माधव... 31.10 2014...

अहम से वहम तक -- नज़्म

अहम् से वहम तक, कामयाबी,ऊँहूँ, दिल नवाज़ी--ऊँहूँ, कुछ तबाही--?हम्म, ग़म गुसारी..?ऊँहूँ, दर्द तारी..हम्म जां निसारी ..?ऊँहूँ, भूल जा सब... उर्मिला माधव 31.10.2015

आज़माना चाहिए

फिल बदीह में अभी-अभी कही गई ग़ज़ल--- :: है ये नेमत ज़िन्दगी तो आज़माना चाहिए, जो भी कुछ मिल जाए उसपे,मुस्कुराना चाहिए, :: hai niyamat zidagi to aazmaanaa chahiye, jo bhi kuchh mil jaaye uspe,muskurana chahiye... :: बेखुदी में मुब्तिला होकर नहीं रहना यहाँ, हंसके ...

अब वो दीवाली

न जाने किस जगह जा कर छुपी है अब वो दीवाली, चरागाँ जब दर-ओ-दीवार होते थे हर इक घर के, मुहब्बत से भरे होते थे रिश्ते .....जब वो पीहर के, ज़रा सी बात पर खुशियां,नज़र आती थीं चेहरे पर, कभी अम्म...

मिला करके देख

नज़र को नज़र से मिला करके देख, कभी मेरे दिल को हिला करके देख, बनाया मुझे जिसने तबियत से ख़ूबाँ, मेरे कूज़ागर से गिला कर के देख, सबाब-ए-मुहब्बत तवारीख होगी, किसी मर्ग-ए-दिल को जिला कर क...

उधार करते हैं

ग़ज़ल हाज़िर है------ ज़ख्म-ए-दुनियां का ग़म छुपाने को वक्ती लम्हा उधार करते हैं, जिससे तक़लीफ दिल को होती है,वो ही हम बार-बार करते हैं.... सबको मालूम है ये ग़म क्या है,ऐसे रस्ते का पेच-ओ-ख़म क्य...

अच्छा नहीं था

फ़ालतू बातों में कुछ रख्खा नहीं था, आप जो कहते थे वो अच्छा नहीं था, तंज,दूरी और फ़क़त लानत,मलामत, एक मुहब्बत के अलावा क्या नहीं था ? कितनी ज़्यादः कोशिशें कीं सीखने की, क्या करें हमक...

ज़रा बचके

निशाना तीर का उसने बड़ी तरकीब से साधा, के जो भी सामने आया,कहा उसको ज़रा बचके.... किसे गद्दीनशीं होंना है,इसका फैसला होगा, मुताबिक वक़्त के बदलेंगी शक्लें कुछ ज़रा हटके... उर्मिला माध...

नहीं सुधरी

मैं जिस्म जीती रही,ज़िन्दगी रही बिखरी, अजीब ज़िद थी,किसी तौर भी नहीं सुधरी, Main jism jiitii rahi,zindagi rahi bikhari Ajeeb zid thi kisi taur bhi nahin sudhrii मैं एक दश्त में खोके हवास रोती रही, वो चीज़ क्या थी,कभी ज़ेह्न से नहीं उतरी, Main ek dasht me kho ke hawas soti rahi Wo chiiz kya thi kabhi zehn se nahin utari...

कुर्सी वाले बाबूजी

चमत्कार को नमस्कार है,कुर्सी वाले बाबूजी राव रंग सब निर्विकार है,कुर्सी वाले बाबूजी रंजू वंजू रीता गीता रोज नाचतीं आँगन में मद्यपान है और बहार है,कुर्सी वाले बाबूजी राग ...

क्या कहूँ जुस्तजू को लिए सो गई

क्या कहूँ जुस्तजू को लिए सो गई, चांदनी उससे पहले ही गुम हो गई, यक़-ब-यक़ शोर काली घटा ने किया, गो कि परछाईं जाने कहाँ खो गई, गाहे-गाहे कड़कने लगीं बिजलियाँ, दिल धड़कने लगा ज़ोर से रो गई, ...

सोज़-ए-ग़म पे वार दी

आंसुओं के साथ मैने,ज़िंदग़ी गुज़ार दी, वक़्त की बला उतारी,सोज़े-ए-ग़म पै वार दी, बेबसी ऑ बेकसी में बेख़ुदी का आसरा, जब हुई ज़ियादती तो मग्ज़ से उतार दी.. किसलिए क़ुबूल हों ये दह्र की नियामत...

बहुत दुश्वार हूं

दो क़दम चलना है मुश्किल,इस क़दर पुर ख़ार हूँ, ये बता दे ज़िन्दगी क्या मैं बहुत दुश्वार हूँ ? क्या करूँ होता नहीं हरगिज़ ज़माने से निबाह अपनी ज़ाती ज़िद को लेकर मैं बख़ुद बेज़ार हूँ, अपने ...

तिरछी नज़र की धार पे

तिरछी नज़र की धार पे क़ुर्बान हो गए, यूँ दिल की खुदकुशी पे पशेमान हो गए, अपने मिजाज़ में तो कभी आशिक़ी न थी, पर ऐसा कुछ हुआ के परेशान हो गए, अंदाज़ अपनी रूह के बस ज्यों के त्यों रहे हम ह...

पर्दा गिरा दूँ

दिल ये कहता है ज़रा सा मुस्कुरा दूँ, और तुम्हारे झूठ पे ....परदा गिरा दूँ, क्यूँ तुम्हारी आबरू पर दाग़ हो कुछ, उंगलियाँ होठों पे रख दूँ चुप करा दूँ.... उर्मिला माधव.... 24.10.2016

होना था मुझको

मैं वही हूँ जो नहीं होना था मुझको, ज़िन्दगी हूँ,इक यही रोना था मुझको, लाद के करती भी क्या बार-ए-मुहब्बत, ज़ख़्म ही तो उम्र भर ढोना था मुझको, उर्मिला माधव

सब्र से

आंधी से हाल-ए-वक़्त से,तूफां के जब्र से, बाहर निकल के आ गई मैं अपनी क़ब्र से, ज़िंदा जला रहे थे सभी मेरे दिल की लाश, और भीड़ में खड़ी थी कहीं मैं भी सब्र से, उर्मिला माधव.... 3.11.2016

आसमान वाली है

एक तरफ़ कुछ धुंआं सा उठता है, इसमें कोइ,ग़म निहां सा लगता है, चार सू .....अजनबी सा आलम है, क्यूँ ये ..वक़्त-ए-गराँ सा लगता है, अब तो बस एक सम्त ख़ाली है, वो के जो ....आसमान वाली है,

आशिक़ी का

अजब तमाशा है आशिक़ी का, नज़र किसीकी सनम किसीका, ज़ुबान शीरीं,फ़रेब दिल में, न कोई समझे है ग़म किसीका, उर्मिला माधव

दुखाया दिल मेरा

ज़िंदगी भर तो दुखाया दिल मेरा, देख ले आकर दिले बिस्मिल मेरा, तंग दिल है तू,मुझे कोई ग़म नहीं, मुझ को देखेगा महे क़ामिल मेरा, उर्मिला माधव.. 16.11.2016

ताले हैं बहुत

ग़म ही ग़म तो अपने दिल में हमने पाले हैं बहोत, क्योंकि सब खुशियों के दर पे यूँ भी ताले हैं बहोत, क्यों रखें हम राबिता,दुनियां के झूठे रंग से, जिसने चाहा उसने हम में ख़म निकाले हैं ब...

बतानी पड़ेगी

हक़ीक़त हमें अब बतानी पड़ेगी, तुम्हें ग़म से बाज़ी लगानी पड़ेगी, तुम्हें याद होगा, कभी हम मिले थे, वही बात तुमको भुलानी पड़ेगी, कहाँ तक तअक़्क़ुब में फिरते रहेंगे तबीयत सभी से हटानी प...

रख रही हूं

एक मतला दो शेर --- मैं किताबों अब सिरहाने रख रही हूं, चंद वरकों में ज़माने रख रही हूं, हर वरक संजीदगी के नाम है, एक माज़ी सोलह आने रख रख रही हूं, एक ख़नक आहों के हिस्से की भी है, सबके अपने...

मनाही नहीं-- फ्री वर्स

मनाही नहीं,सूरत देखने की, पर इसे पढ़ना भी है दिल से नहीं दिमाग़ से, कितने फरेब लिखे हैं मुश्किल है ऐसे चेहरों की इबारत पढ़ना सूरत जितनी दिलकश, उतनी उलझी हुई इबारत, तुमने सुना भी ...

देख लो

ख़ुद ही सूरत,ख़ुद-ब-ख़ुद ही आईना हूँ देख लो, ख़ुद रुबाई खुद-ब-ख़ुद हम्द-ओ-सना हूँ देख लो, :: khud hii surat,khud-b-khud hii aaiinaa hii dkh lo, khud rubaii,khud-b-khud hamd-o-sanaa hun dekhlo :: पाक़-ओ-ताहिर दिल ये मेरा ग़ैर का तालिब नहीं, ख़ुद ही चाहत ख़ुद-ब-ख़ुद ही आशना हूँ दे...

हुजूम-ए-दुश्मनां

इक हुजूमे-ए-दुश्मनां, सामने है रायगां, इक मुहब्बत के लिए !! किस क़दर हैं बदगुमां, ज़ीस्त जिसने दी मुझे, वो ही देगा सायबां, खुद-ब-खुद करना सभी, कौन किसपे मेहरबां, वक़्त देखा बदतरीन, था ...

क्या करूँ मैं

आसमां पै रास्ता अब वा करूँ मैं ? या नई दुनियां कोई पैदा करूँ मैं ? जब ख़ुदा भी हाथ में खंज़र लिए हो, कौनसे दर पै भला सजदा करूँ मैं ? हर शिकायत आपको ज़ाहिर तो की है, और अब किस ढंग से शिकवा ...

पहाड़ हो गई

सहेलियों, आगे बाद में 😢 बाबा की बैठक, अम्मा की रसोई, बाबुल की देहरी, सब में एक आड़ होगई, वो देहरी पहाड़ होगई, घर का वो जीना, चढ़ें आवै न पसीना हर इक महीना जैसे, सावन का महीना, सब में एक आ...

ख़्वाब

ख़्वाब तुम्हारे गढ़े ही कब थे, तुम इस दिल में,चढ़े ही कब थे ? ख़ुद खीची जो लकीर हम ने, उस से ज़्यादा बढ़े ही कब थे? तुम से प्यार का शिकवा कैसा', तुम ये लफ़्ज़, पढ़े ही कब थे ? उर्मिला माधव 26.10.2017

हाज़िर करूँगी मैं

जो अब तक कर रही हूँ मैं,वही फिर-फिर करुँगी मैं, अगर कोई ठेस पहुंचेगी,ग़ज़ल हाज़िर करुँगी मैं, कोई जज़्बात अपने दिल में रखके रो नहीं सकती, कोई आज़ार हो, अल्फ़ाज़ से ज़ाहिर करुँगी मैं, अया...

सिहर के

कभी कुछ बिखर के,कभी आह भरके संभाला है ये दिल मुसलसल सिहर के, किसे क्या बताते अजब मुश्किलें थीं, ख़तरनाक दुनिया में गुजरी है डर के, न जाने वो क्या था समझ में न आया, के ये जिंदगानी म...

दोगली दुनियां

ये दुनियां,दोगली दुनियां, ये दुनियां खोखली दुनियां, झुका ले सर अगर दम है, ये दुनियां,ओखली दुनियां... न पहचाना मगर सर पर, ये दुनियां ठोक ली दुनियां, मुसव्विर ने भी पछता कर, ये दुन...

माहिर करूँगी मैं

जो अब तक कर रही हूँ मैं,वही फिर-फिर करुँगी मैं, अगर कोई ठेस पहुंचेगी,ग़ज़ल हाज़िर करुँगी मैं, कोई जज़्बात अपने दिल में रखके रो नहीं सकती, कोई आज़ार हो, अल्फ़ाज़ से ज़ाहिर करुँगी मैं, अया...

मुस्करा दूँ

दिल ये कहता है ज़रा सा मुस्करा दूँ, और तुम्हारे झूठ पे ....परदा गिरा दूँ, क्यूँ तुम्हारी आबरू पर दाग़ हो कुछ, उंगलियाँ होठों पे रख दूँ चुप करा दूँ.... उर्मिला माधव.... 24.10.2016

हिसाब करते रहो

ख़ुद सवाल-ओ-जवाब करते रहो, अपने दिल से हिसाब करते रहो... क्यूँ ये अरमान यूँ ही मर जाए, तलब-ए-आफ़ताब करते रहो, चांदनी हो या चाँद हो ख़ुद ही, तुम तो नीयत खराब करते रहो, चाहे तरज़ीह कोई दे या ...

रूड बोले थे--- फ्री वर्स

तक़लीफ़ हुई थी, जब तुम पहली बार रूड बोले थे, ताज्जुब हुआ था, जब प्रतिउत्तर में तुम झूठ बोले थे, तुम ये समझे,मैंने मान लिया था, पर नहीं समझे तो बस इतना, कि मैंने सब कुछ जान लिया था , परद...

परवाह बोलो

मैं किसीकी क्यूँ करूँ परवाह, बोलो, एक तरफ़ा कब निभी है चाह, बोलो, जानिब-ए-मंज़िल मुझे जाना ही होगा, ज़िन्दगी भर क्यूँ तकूँ अब राह, बोलो, ज़िन्दगी को दर्द-ए-गम का वास्ता दूँ ? क्या वो आइ...

संवर जाएं

अपनी सांसों के संग संवर जाएँ, इससे पहले कि ये बिखर जाएँ, इतनी तौफीक हमको हासिल हो, अपने पैरों पे चल के घर जाएँ... #उर्मिलामाधव... 22.10.2015

शीशे में बाल आया हुआ

जा नहीं सकता कभी शीशे में बाल आया हुआ, दिल भुला देगा कभी उनका ख़याल आया हुआ :: ja nahin sakta kabhi shishe men baal aaya hua, dil bhula dega kabhi unka khayaal aaya hua, :: जाने किस-किस शक्ल से उठती रही हैं उँगलियाँ, जैसे मेरी सादगी पर .........हो सवाल आया हुआ :: jaane kis-kis shaql m...

जी लिया

हमने मर्यादा में रह कर एक जीवन जी लिया, आत्म मंथन कर लिया ऑ आंसुओं को पी लिया, किंतु ये भी सत्य है हम रह गए बिल्कुल अकेले, फिर भी आँचल कंटकों में फट गया तो सीं लिया उर्मिला माधव, 22.10.2...

नज़्म देखा किये

दूर तक जाते हुए क़दमों को हम देखा किये, दिल में कुछ चीखें उठीं पर लब तलक आईं नहीं, बेवजह,बेसाख़्ता,बेइन्तिहा देखा किए, तू न आएगा कभी अब लौट कर ऐ रहनुमाँ, मुब्तिला-ए-गम थे हम बस जा...

इक दिया जाकर

आंधियां चल रही हैं लहरा कर मैं भी रख आऊं इक दिया जा कर हर तरफ रौशनी का आलम है, तीरगी क्या करेगी अब आ कर, इन चरागों में कुछ न कुछ तो है, लौट जाती है अब हवा आकर, अब वहां जाने का ख्याल न क...

सूटकेस ख़ाली है

अब मेरा सूटकेस ख़ाली है, तेरी हर याद जो हटाली है, वो जो चिठ्ठी थी इसके खीसे में, इस बरस होली में जला ली है, मुझको भाता नहीं है रंग-ए-गुलाल, इसलिए खाक़ बस उड़ा ली है, बेवफ़ा तुझको क्यूँ क...

बड़ी दूर तलक

जिस्म ही बार नज़र आया,बड़ी दूर तलक, के जहां ख़ार नज़र आया ,बड़ी दूर तलक, हर कलेजे को बहुत देर ठहर छान लिया, गर्द-ओ गुब्बार नज़र आया,बड़ी दूर तलक, जो निगाहों से परखने की कभी जुर्रत की, सिर्...

तुम कौन हो ----फ्री वर्स

तुम कौन हो,मैं नहीं जानती, आज भी नहीं और शायद कभी नहीं जानती थी, अजनबी मिलते हैं, बिछुड़ जाते हैं, मिलन के साथ बिछुड़न ही क्रम है हादसों में जानें चली जाती हैं जिन्दा इंसान मुर्द...

जानते हैं

मुश्किलों से दिल लगाना जानते है, लब हमारे.....मुसकुराना जानते हैं, ज़िंदगी जिंदा दिली का नाम है पर, बेख़ुदी क्या है.....बताना जानते हैं, राह चलने का हुनर मालूम है अब, आग से दामन बचाना....ज...

इल्ज़ाम सर लिया

एक ग़ज़ल.... जो उसे करना था उसने कर लिया, मैंने बस इलज़ाम अपने सर लिया, फासले दिल में मुक़म्मल हो गए, और दामन इक धुंए से भर लिया, मुतमइन को ई हो गया उससे बहुत, मैंने हिस्से में महज़ एक डर ल...