पीर भरा निश्वास है प्रियवर
पीर भरा निश्वास है प्रियवर, गर्व भरा हुंकार नहीं है,
मौन हमारा परिलक्षित है,अपितु कोई आकार नहीं है
मन में युद्ध बहुत सारे हैं शांत चित्त रहते हैं फिर भी
कोलाहल हम कर सकते थे, किंतु ये शिष्टाचार नहीं है,
आप रहें स्वछंद सदा ही, जिससे हो व्यवहार आपका
घर संसार आपका प्रियवर अपना ये अधिकार नहीं है..
उर्मिला माधव
Comments
Post a Comment