आस पास रह गया
ग़म हमारी ज़िंदगी के आस-पास रह गया,
बस लबों से हंस दिए, दिल उदास रह गया।
मुश्किलें थी और थी बस दर्द की वाबस्तगी,
कौन अपनी ज़िंदगी में ग़म शनास रह गया।
आह,चीखें रंजो ग़म सब बर्फ़ हो के जम गए,
जिस्म गल के गिर गया है बस लिबास रह गया।
उर्मिला माधव
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