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Showing posts from May, 2018

हक़दार हैं

हम मुहब्बत में...वजीफ: ख्वार हैं, हम ही.बस....हालात से लाचार हैं, उम्र भर तनख्वाह तक तो ठीक है, क्यूँ वजीफ: के फ़क़त..हक़ दार हैं?? ----------------------------------- ham muhabbat min vziifah khwaar hain, bas ham hii haalaat se laachaar hain, umr bhar tankhwaah tak to thiik hai, kyun vazifah ke faqat haqdaar hain.... उर्मिला माधव... 1.6.2014...

मुस्कुराए जाती है

नींद आँखों में आये जाती है, मुझ पै बस मुस्कुराये जाती है, हर तरफ रौशनी का है आलम, तीरगी मुझ पै छाये जाती है, हुक उठती है दिल में रह-रह के, मुझ को बेजा दुखाये जाती है, अपने आपे में ही ...

घर गई हूं मैं

कहीं भी राह में थक कर ठहर गई हूँ मैं कोई बताये के किस-किसके घर गई हूँ मैं, अजब अज़ाब था जो मेरी सम्त आया था, तमाम उम्र को ज़ख़्मों से भर गई हूँ मैं, मिरी हयात के अंजाम सब अधूरे हैं, यही ...

दिखा दूँ तो

दिल के छाले अगर दिखा दूँ तो, अपनी किस्मत के ख़म गिना दूँ तो, फ़ाख्ता बनके होश उड़ लेंगे, ज़िक्र ग़र रू-ब-रू चला दूँ तो, चश्म-ए-गिरियाँ में डूब जाआगे अपनी दुनियां के ग़म सुना दूँ तो, आबशा...

हम खड़े हैं फ्री वर्स

हम खड़े हैं, ज़मीन समझ कर जिसे, खिसक सकती है पैरों तले से, अद्भुत है,इसका खिसकना, कभी सदमे देखोगे तो शायद समझ सको, क्या होता है ज़मीन खिसकना, दरारें बड़ी हो जाती हैं, फिर नहीं भरतीं क...

ज़िद है

हमें ख़ुद को ख़ुद आज़माने की ज़िद है, जहाँ को अक़ीदत जताने की ज़िद है, ब दम टूट सकते हैं मरने की हद तक, ये कूव्वत जहाँ को  दिखाने की ज़िद है, मुहब्बत में झुकना,झुकाना अबस ही, ये अहमक चलन ह...

इस्तेमाल करते हैं

कुछ दोस्तों के नाम---- लोग जब इस्तेमाल करते हैं, लम्हा लम्हा हलाल करते हैं, कुछ सहूलत अगर नहीं पाई, फिर तो  क्या क्या वबाल करते हैं, कुछ भी रिश्तों में ज़र्क आजाये, तब हजारों सवाल क...

दम निकलता है

पहली पोस्ट ग़लती से डिलीट हो गई। . अब तज़बज़ुब से दम निकलता है, ज़ेहन-ओ-दिल तिश्नगी से जलता है, मेरे ख़ैमे में इतने सूरज हैं, इनकी गर्मी से ग़म पिघलता है, सब बुझाती हूँ अपने हाथों से, रे...

बचते हैं

ख़ुद को शायर तो सब समझते हैं, सच को कहने से...साफ़ बचते हैं, ख़ुद की नज़रों में ख़ुद मेयारी हैं, सातवें आसमां पै रहते हैं बात लिखते भी हैं मुहब्बत की, उसपे हाथों से मुंह को ढकते हैं, अब क...

फ्री वर्स

ये तुम्हारे मन की ही परिकल्पना है मैं जहाँ हूँ बस वहीँ हूँ, दिन प्रतीक्षित हो गया, अनमने हो जानती हूँ, पर ये देखो वेदना का एक सागर, कर नही सकती हूँ मैं इसको उजागर, ये प्रतीक्षित ...

नज़्म अजनबी सी

ये दिल ढूँढता है जगहा अजनबी सी, हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी, कभी ज़िंदगी में ये दिन भी दिखाना, के हर सम्त इक अजनबी रंग लाना, ज़मीं अजनबी,आसमां अजनबी हो, कोई शख्स हो रु-ब-रु,अजनबी हो, लग...

शाम अपनी

दूर से है दुआ सलाम अपनी, ख़ूब अलमस्त है ये शाम अपनी, पूछना चाहते हैं अब तुम से, ज़िन्दगी कर चुके तमाम अपनी ? होश आना हमें ज़रूरी था, बेख़ुदी कर रहे थे नाम अपनी, ख़ुद को फिर से उठाके देखा ...

लूट ले गए

चुपके से आए,जान-ओ-जिगर लूट ले गए, हमको बताया तक नहीं घर लूट ले गए , किसको बताएं हाल ऐसी बेबसी का उफ़, जीना मुहाल,शाम-ओ-सहर लूट ले गए, जो मुन्तजिर रहें तो भला क्या रहें कहो, हम उम्र भर च...

अतुकांत

नीरव जंगल, नदी मौन है , कौन है? जो क्रंदन करता है? निष्ठा के दर्पण डोले हैं, किसके भाव कहाँ तोले हैं, मौन धरा है, मौन गगन है, दूर कहीं कोई स्वर उभरा है, आज बहुत बेचैन है धरती, बादल कोई ...

तुम कहाँ थे

मैं तुमको ढूंढती थी,कल रात तुम कहाँ थे? आँखों में दम नही था,जज़्बात बस रवां थे, कुछ हौसला बढाकर देखा जो आसमां को, महताब कह रहा था तुम उसके रहनुमां थे, रह-रह के बिजलियाँ सी,कौंधा कर...

अच्छे लगे थे

कितने ही सामान चेहरे पर सजे थे, आपके झुमके बड़े अच्छे लगे थे, क्या गले बाज़ी थी,वाह वाह आपकी, लोग उठ कर झूमने गाने लगे थे, उर्मिला माधव

तौबा-तौबा हया कीजिये

रुख पै पर्दा गिरा लीजिये, तौबा-तौबा हया कीजिये, हम हैं ख्वाहिश अगर आपकी, दिल पै दस्तक दिया कीजिये, हैं अदीबों की हम ज़ात में, कुछ क़दम हौसला कीजिये , लोग देंगे भी क्या आपको, हमसे ह...

दस्तार की

वो के जिनको थी ज़रूरत प्यार की, क्यों ........दुहाई दे गए दस्तार की... तितलियों के रंग दिखला कर हमें, बस .मिटाते हैं खिजालत हार की, हम से बढ़कर कौन जाना है उन्हें, दास्तां क्या है.... दिले बीम...

टूट गया है

अपनों के सितम देख के दिल रूठ गया है, बेहद सताया जा चुका दिल .....टूट गया है.... जिसकी तलब में आ गई हूँ तेरे दर तलक, उसके ही ज़ेरे पाँव ये......दिल छूट गया है, apnon ke sitam dekhkar dil rooth gaya hai, behad sataaya jaa chuka dil toot gaya hai.. #urmilamadhav... 24.4.2015

लफ़्फ़ाज़ी से

राजनीति से कोई लेना-देना नहीं---- ====================== ज़हरीले नागों की तीर अंदाज़ी से, अच्छे-अच्छे बहक गए लफ्फाज़ी से, आसां नईं है खबरदार ख़ुद से होना, पीछे ही चलते सब इनकी राज़ी से, इनकी ही फितरत के फ...

आदत नहीं रही

दुनियां में किसी शै से मुहब्बत नहीं रही, हमको किसीके प्यार की आदत नहीं रही, आगे क़दम तो पीछे अदावत के जाल हैं, दिल से मिलें किसीसे भीे,चाहत नहीं रही, दिल के बहुत क़रीब थे जब वो बदल ...

शर्मिंदगी है

हमारी डायरी से.... क्या बची आँखों में कुछ शर्मिंदगी है? या अभी तक भी मुसलसल गंदगी है? आग दरिया में लगा कर क्या करोगे? जिसकी फितरत ही सरासर बंदगी है, दिल हमारा खूब दरिया है अभी तक, इ...

नज़्म

एक नज़्म... (पुराने पन्नों से) आदमी कुछ अजीब लगता था, ज़िंदगी सा करीब लगता था, उन दिनों दिल का एक आलम था, मुश्किलों का असर ज़रा कम था , उसको देखे से चैन मिलता था, बस खुदा से वो ऐन मिलता था, ...

लगा दो आग दुनियां में

Lagado aag duniyan main agar dil khud ka jalta ho, karo tabdeel cheekhon main agar gum na sanbhlta ho, agar koi sath na de to tum apna aasmaan rach lo, kaleja chaaq hota hai agar gum dil mai palta ho..... Urmila Madhav.. 20.5.2013

किला सा है

ये जो यादों का सिलसिला सा है, बे-वज्ह रेत का क़िला सा है , मैंने  ग़म पहली बार ही देखा, फिर भी ये क्यूँ लगा मिला सा है, ज़ख्म पैवंद जैसा लगता है, ज़ीस्त के तार से सिला सा है, रात को घर जो ख्...

अच्छा ख़ासा है

ज़िंदगी है या एक तमाशा है? इसमें भी ट्विस्ट अच्छा खासा है, मेस्मरेज़म भी कम नहीं इसमें, पल में तोला है पल में माशा है, शौर्ट सर्किट से मर गया कोई, जिसके हाथों में एक कासा है, डैम के...

मेरे हिस्से में तू ही आया था

जब खुदा ने दहर बनाया था, मेरे हिस्से में तू ही आया था, तेरी जो उम्र एक अमानत थी, वक़्त ने उसको लूट खाया था, उसपे उम्मीद भी तो क़ायम थी, गो कि हर रोज़ घर सजाया था, शाम ढलने को जब भी होती थी...

अहद से

हम गुज़र जाते हैं इक जद्दोजहद से, जब किसी को देखते हैं,आगे हद से.... दायरों की फ़िक्र में होकर परीशां, मांगते हैं बस दुआएं हम अहद से... उर्मिला माधव 20.5.2016 अहद----- समय

सज़ा दे रही हूँ मैं

कब से बुलंदियों को सज़ा दे रही हूं मैं, दिल को ग़लत जगह का पता दे रही हूँ मैं, सेहरा से रेत लेके,बनाया है पैराहन, तूफां को बिजलियों को सदा दे रही हूं मैं, दरकार ही नहीं है मुझे कोई  ग़...

हिंदी गीत

भित्ति चित्रों से उकेरे शब्दअब कुछ, जिजीविषा भी छल रही है जब स्वयं को, जो सवेरे श्वांस में अब तक निहित थे, आ खड़े हैं बेधने अंतर अहम् को, दूर की अब दृष्टि धुंधलाने लगी है, और कब तक ...

एक बचपन

एक बचपन, तनहा माँ, शिफ़ाखानों के चक्कर काटती हुई, अतिब्बा के चेहरे ताकती हुई, वो तनहा तीन वर्ष, याद आ जाता है,माँ को, शून्य में बस देखना और सोचना, कौनसा रिश्ता,खंगालूँ? शायद कोई भ...

मर गए

इसलिए अहसास सारे.…....मर गए, ज़ख़्म ही कुछ काम ज़्यादः कर गए, रहगुज़र में साथ जो थे हमसफ़र, राह भर तो साथ थे फिर घर गए,.. उर्मिला माधव

रोया नहीं

तू मुहब्बत में कभी रोया नहीं, तूने शायद आईना देखा नहीं, Tu muhabbat men kabhi roya nahi, Tune shayad aaina dekha nahin, वक़्त के चेहरे की देखीं झुर्रियां, क्या दरूँ था ये कभी सोचा नहीं, Waqt ke chehre ki dekhin jhurriyaan, Kya darun tha,ye kabhi socha nahin, उम्र भर तड़पे ये तनहा ज़िन्दगी, त...

टूटेगा ही

सपना है तो.......टूटेगा ही, रिश्ता है तो.......छूटेगा ही, दिल आईना है तो आखिर, एक न एक दिन फूटेगा ही, दीवारें मसकन की...छोटी, रहजन चढ़कर...लूटेगा ही, चौकस रहना सीख ले वर्ना, छाती तब फिर...कूटेगा ही...

आपकी कसम

दुनियाँ से कुछ मिला भी नहीं...आपकी क़सम, और हमको कुछ गिला भी नहीं,आपकी क़सम, हम उम्र भर निभाया किये...मुश्किलों के साथ, और इसका कुछ सिला भी नहीं,आपकी क़सम, किस दरज़ा हम जगाते रहे.....कम नसी...

हिंदी ग़ज़ल जो मिली गुरु से

परीक्षा तो परीक्षा है अब वो चाहे जीवन की हो या पी.एच.डी.की प्रवेश परीक्षा हो... जो मिली गुरु से तुम्हारे,क्या वो दीक्षा छोड़ दोगे?? क्या किसी परिणाम के भय से परीक्षा छोड़ दोगे?? है सम...

रायगां

एक मैं हूँ और हुजूमे दुश्मनाँ, हूँ अकेली हाशिये पर रायगाँ, ख़ूब है अदबी सियासत,रंग पे, तू कलेजा देख मेरा जाने जाँ, मैं सहारों से नहीं चलती कभी, और नहीं दरकार कोई मेहरबाँ, उर्मिल...

एक मतला

उठाके उसने कमाने अबरू.....वो तीर साधा के बस ग़ज़ब था, जो दिल मुहब्बत में मुब्तिला था,संभलना होगा ये होश कब था, #उर्मिलामाधव... 18.5.2015

हे भगवान

आपा-धापी हे भगवान!! दौड़ा-भागी हे भगवान!! क्या सच में इंसान यही? खींचा-तानी हे भगवान!! एक दूजे के कान भरे, काना फूसी हे भगवान !! दीवारों की मजबूती? ताका-झांकी हे भगवान !! मक्कारी का रंग ...

क़ुबूल कर

एक मतला मेरी ग़ज़ल से---- ******************************** तेरे दिल को जिससे सुकूं मिले,तू बिला शुबहा वो क़ुबूल कर, नहीं दिल में जिसकी जगह कोई, उसे याद करके न भूल कर उर्मिला माधव... 17.5.2015...

मतला

क्या बतलाएं दुनियां को,हम किसको पुकारा करते हैं, हर रोज़ वो चल कर आते हैं, हर रोज़ इजारा करते हैं, #उर्मिलामाधव... 17.5.2015

नक़ब के लिए नहीं

मेरा मकान था, नक़ब के लिए नहीं, दर-ओ-दीवार सील जाते हैं, नक़ब की चोट से, और तब निकल जाती है दम बुनियादों की, घेरे टूटने का एक दर्द होता है, प्यार का घेरा, इकरार का घेरा, दीदार का घेरा, त...

ताक़ीद की

जाने किस-किस ने हमें ताकीद की, क्यूँ नहीं देखी चमक खुर्शीद की ? जबकि एहसास-ए-रक़ाबत होगया, किससे तब उम्मीद हो ताईद की ? सब चमक से ही अगर मंसूब था, सबसे बेहतर थी चमक नाहीद की, वक़्त-ए-म...

रायगां

एक मैं हूँ और हुजूमे दुश्मनाँ, हूँ अकेली हाशिये पर रायगाँ, ख़ूब है अदबी सियासत,रंग पे, तू कलेजा देख मेरा जाने जाँ, मैं सहारों से नहीं चलती कभी, और नहीं दरकार कोई मेहरबाँ, मुत्मई...

रिश्ते तमाम होते हैं

हादसे सुब्ह-ओ-शाम होते हैं, रोज़.....रिश्ते तमाम होते हैं, अपने अख़लाक़ पे,नज़र ही नहीं, दाग़........लोगों के नाम होते हैं, जो भी चाहा जुबां से कह डाला, और तब क़त्ल-ए-आम होते हैं, ये जो मजमा लगाया ...

मिट गईं

रन्जिशों की धार पर कितनी निशानी मिट गईं, सल्तनत कितनी मिटी कितनी रिआया मिट गईं, किन दरख़्तों की ना जाने कितनी शाखें मिट गईं, सब्ज़ पत्ते मिट गए और नौजवानी मिट गई, मिट गए कितने...

या नईं आए होते

वो अगर मिलने यहाँ तक आये होते, तो मेरे दिल तुम बहुत ललचाये होते, हाथ रखते,वो फ़सीलों पै भी आख़िर उस हथेली के निशाँ भी आये होते, बैठ जाते घर के एक दीवान पर भी, दर्द अपने दिल के कुछ बत...

बिखरते रहिये

मन में लाख़ बिखरते रहिये, काम तो फिर भी करते रहिये, दर्द कोई .....पहचान सके ना, ग़म से ...ख़ूब गुज़रते रहिये, क़दम अगर जब साथ न दें तो, हिम्मत से .....दम भरते रहिये, जीने की  ग़र ख्वाहिश है तो, क़दम आ...

शहनाइयां हैं

ये नदी की धार ?.....या गहराइयां है? या के नाज़ुक वक़्त की अंगड़ाइयां है?, आँख है मानिंद मुर्दों के सरासर, कान के नज़दीक ही शहनाइयां है, ज़ह्र से नीले हैं आँखें,दिल जिगर तक, दह्र की नज़रों मे...

आएगा ही

एक जब बिछड़ा है,दूजा आएगा ही, और जो आया है वो भी जाएगा ही, मन न मैला कर मुसफिर, रास्ता है, एक दो ठोकर तो यूँ भी खायेगा ही, उठ भी जा होजा खड़ा पैरों पै अपने, चल, अँधेरा और भी गहराएगा ही, क्...

तो मैं जानूं

डूबते सूरज की समझे नातवानी तो मैं जानूँ, और अपनी छोड़ दे ये हुक्मरानी तो मैं जानूँ बादशाहत के नशे में चल रहा है झूम कर तू, बिन नशे के जी ज़रा ये ज़िंदगानी तो मैं जानूँ, हो गए गद्दीन...

फ्री वर्स

तुम्हारे हाथ देखूं? ओह लेकिन ये कहीँ ख़ाली नही, जो हज़ारों भाग्य रेखाएं जुडी हैं, ये तुम्हारे हाथ से पूरी हुई हैं, किसके दरवाज़े पै कितनी बिल्लियाँ हैं, किसकी छाती पर बरफ की सिल...