शाम अपनी
दूर से है दुआ सलाम अपनी,
ख़ूब अलमस्त है ये शाम अपनी,
पूछना चाहते हैं अब तुम से,
ज़िन्दगी कर चुके तमाम अपनी ?
होश आना हमें ज़रूरी था,
बेख़ुदी कर रहे थे नाम अपनी,
ख़ुद को फिर से उठाके देखा है,
सांस भी कर रही है काम अपनी.....
उर्मिला माधव
दूर से है दुआ सलाम अपनी,
ख़ूब अलमस्त है ये शाम अपनी,
पूछना चाहते हैं अब तुम से,
ज़िन्दगी कर चुके तमाम अपनी ?
होश आना हमें ज़रूरी था,
बेख़ुदी कर रहे थे नाम अपनी,
ख़ुद को फिर से उठाके देखा है,
सांस भी कर रही है काम अपनी.....
उर्मिला माधव
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