क़ुबूल कर

एक मतला मेरी ग़ज़ल से----
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तेरे दिल को जिससे सुकूं मिले,तू बिला शुबहा वो क़ुबूल कर,
नहीं दिल में जिसकी जगह कोई, उसे याद करके न भूल कर
उर्मिला माधव...
17.5.2015...

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