नज़्म अजनबी सी

ये दिल ढूँढता है जगहा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी,

कभी ज़िंदगी में ये दिन भी दिखाना,
के हर सम्त इक अजनबी रंग लाना,
ज़मीं अजनबी,आसमां अजनबी हो,
कोई शख्स हो रु-ब-रु,अजनबी हो,

लगे जिसकी हर इक अदा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी.....

हथेली पे हों नाम कुछ अजनबी से,
पढ़े ही न जाएँ,पढ़ें हम कहीं से,
हो रूह-ओ-ज़ेहन से तलब अजनबी सी
सुनो मुख़्तसर,कुल जहां अजनबी हो,

मिले दर्द-ए-दिल को दवा अजनबी सी,
हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी...

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