मेरे हिस्से में तू ही आया था
जब खुदा ने दहर बनाया था,
मेरे हिस्से में तू ही आया था,
तेरी जो उम्र एक अमानत थी,
वक़्त ने उसको लूट खाया था,
उसपे उम्मीद भी तो क़ायम थी,
गो कि हर रोज़ घर सजाया था,
शाम ढलने को जब भी होती थी,
माह-ओ-अख्तर को घर बुलाया था,
मेरी आँखें खुली-खुली ही रहीं,
तू न फिर लौट घर को आया था,
कैसे मुझको यक़ीन हो कह दो,
मैंने पत्थर से दिल लगाया था,
मुझसे दुनियाँ के लोग कहते हैं,
तू ही तू मेरे दिल पै छाया था...
#उर्मिलामाधव...
20.5.2015...
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