आपकी कसम


दुनियाँ से कुछ मिला भी नहीं...आपकी क़सम,
और हमको कुछ गिला भी नहीं,आपकी क़सम,

हम उम्र भर निभाया किये...मुश्किलों के साथ,
और इसका कुछ सिला भी नहीं,आपकी क़सम,

किस दरज़ा हम जगाते रहे.....कम नसीब को,
ये टस से मस हिला भी नहीं....आपकी क़सम,

हर तरहा अजनबी थे हर-इक शहर के लिए,
जाना कोई ज़िला भी नहीं....आपकी क़सम,

रहती थी जुस्तजू सी....किसी ख़ास शख्स की,
बस फिर ये सिलसिला भी नहीं आपकी क़सम,
उर्मिला माधव
18.5.2018

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