आएगा ही

एक जब बिछड़ा है,दूजा आएगा ही,
और जो आया है वो भी जाएगा ही,

मन न मैला कर मुसफिर, रास्ता है,
एक दो ठोकर तो यूँ भी खायेगा ही,

उठ भी जा होजा खड़ा पैरों पै अपने,
चल, अँधेरा और भी गहराएगा ही,

क्या मज़ाक ए हुस्न है इनसान का अब,
साँस है जब तक, अबस इतरायेगा ही,

भूलना खुद को ये फितरत है बशर की,
कोई तो फिर रास्ता बतलायेगा ही
उर्मिला माधव...
14.5.2015..।

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