हिंदी ग़ज़ल जो मिली गुरु से
परीक्षा तो परीक्षा है अब वो चाहे जीवन की हो या पी.एच.डी.की प्रवेश परीक्षा हो...
जो मिली गुरु से तुम्हारे,क्या वो दीक्षा छोड़ दोगे??
क्या किसी परिणाम के भय से परीक्षा छोड़ दोगे??
है समर जीवन भयंकर,साथ कंटक पथ निरंतर,
किन्तु क्या प्रारब्ध के भय से प्रतीक्षा छोड़ दोगे??
प्रक्रिया है आत्म विश्लेषण से मत बचना कभी तुम,
क्या किसी अपमान के भय से समीक्षा छोड़ दोगे ??
उर्मिला माधव...
18.5.2014...
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