रायगां

एक मैं हूँ और हुजूमे दुश्मनाँ,
हूँ अकेली हाशिये पर रायगाँ,

ख़ूब है अदबी सियासत,रंग पे,
तू कलेजा देख मेरा जाने जाँ,

मैं सहारों से नहीं चलती कभी,
और नहीं दरकार कोई मेहरबाँ,

मुत्मईं दिल होगया बस यक़-ब-यक़
गुल्फ़िशानी कर गया इक गुल्फ़िशाँ,

खुशबुओं से भर गया दिल भी मिरा,
खुशनुमां लगने लगा हर गुलसितां...

अपने दम पर ही चले हैं उम्र भर,
हो गया बस ख़ुद-ब-ख़ुद रस्ता रवाँ...
उर्मिला माधव

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