मिट गईं
रन्जिशों की धार पर कितनी निशानी मिट गईं,
सल्तनत कितनी मिटी कितनी रिआया मिट गईं,
किन दरख़्तों की ना जाने कितनी शाखें मिट गईं,
सब्ज़ पत्ते मिट गए और नौजवानी मिट गई,
मिट गए कितने सिकन्दर और मिटी राहे जुनूँ,
मिट गए हुक्काम हाकिम ,बस कहानी रह गई,
बस कहानी रह गई ...................
उर्मिला माधव..
15.5.2013
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