एक मतला तीन शेर

दिल तो शर्माता है फिर भी,तुम कहो तो प्यार लिख दूँ,
और तुम्हारे दिल के आगे,अपने दिल की हार लिख दूँ ?

प्यार के इन दायरों में बंध के रहना ....है तो मुश्किल,
पर किसी दीवार के कोने में इक इज़हार लिख दूँ

दिल ये कहता है,तुम्हीं मख़सूस हो मेरे लिए ,
सोचती हूँ दिल ही दिल में,तुमको मैं दिलदार लिख दूँ....

ज़िन्दगी तो हर क़दम दुश्वारियों का नाम है
बस इन्ही दुश्वारियों में,इश्क़ का किरदार लिख दूँ
उर्मिला माधव

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