चार मिसरे

तुम गीत लिखो मैं प्रीत लिखूं,
जीवन की सच्ची रीत लिखूं,

बदरा बरसे जब आँगन में,
तो कण-कण में संगीत लिखूं ,
उर्मिला माधव

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