गीत

व्यथा कथा और अंतर्मन,
बीत गया पूरा जीवन,

मार्ग सतत हम चलते हैं,
स्वयं स्वयम को छलते हैं,

आते भ्रम जाल समझ सब ही
हम फिर भी धंसते जाते हैं,

परिचर्या जीवन शैली की,
जीवन भर समझ न पाते हैं,
उर्मिला माधव..
11.1.2017

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