एक मतला एक शेर

उसकी हस्ती मुझसे कब ख़ाली रही,
मेरे संग संग ....,उसकी दीवाली रही,

कोई भी हक़दार उसका कब रहा,
बिन मेरे बस उसकी बदहाली रही,
उर्मिला माधव,
26.1.2017

Comments