एक मतला एक शेर

साजिंदे उठा लाये हैं,क्यूं ताम-झाम सब,
साँसे तो कह रही हैं,के ऊंचा है बाम अब,

कुछ हाशिये लगे हैं,हर इक ज़ीस्त के तईं,
पहले मिला है वक़्त से,किसको पयाम कब,
उर्मिला माधव

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