ग़ज़ल

बस जुदा होकर हरासां कर गया,
ज़िन्दगी लेकिन चरागां कर गया,

जब ये पूछा साथ तो चल पाओगे ?
उलझनों में था सो हाँ हाँ कर गया,

देखते बनती थी उसकी कश्मकश,
मुस्कुराने भर को सामां कर गया,

क्या ये कम है ज़िन्दगी के वास्ते,
ख़लवतों की राह आसां कर गया

दूर तक ......देखा किये हम रहगुज़र,
दिल का इक कोना सा वीरां कर गया,
उर्मिला माधव ..
22.1.2017

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