एक मतला दो शेर

प्यार का जाम पियो,ग़र जो पिला दे कोई,
इतना एहसास रहे......ग़म न बढ़ा दे कोई...

ख़ुद पस-ए-पर्दा रहो, धूल बहुत उड़ती है,
अपनी ठोकर से कहीं ख़ाक उड़ा दे कोई,

सांस तरतीब से आ जाये के इतना तो रहे,
दर्द क्या कम है के कुछ और हवा दे कोई,
उर्मिला माधव..
18.1.2017

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