एक मतला एक शेर Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps January 14, 2018 ये कोई जिस्म हुआ...ज़ख़्म ज़माने भर के, चार क़दमों ही पे याद आएं ,ठिकाने घर के.. क्या मिलें उनसे न अख़लाक़-ए-मुहब्बत न लिहाज़, जिन के होठों पे महज़, प्यार दिखाने भर के, उर्मिला माधव .. 15.1.2017 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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