हुज़ूर

आपने पत्थर उठाया फेंक कर मारा ज़ुरूर,
हम ही शर्मिंदा हैं क्यों ये लग नहीं पाया हुज़ूर,

ख़ैर जाने दीजिए,ग़म छोड़िये इस बात का,
फिर मशक़्क़त कीजिये ऑ फेंकिये फिर बा शऊर,

दीजिये इसको मुआफ़ी, यूँ भी ये पथ्थर सा है,
काम पथ्थर सा करेगा,इसमें इसका क्या कुसूर,
उर्मिला माधव,
30.1.2017

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