ग़ज़ल

फिल्बदीह के तह्त कही गई ग़ज़ल----

तीर अब दिल पर चलाना छोड़ दे
अपनी खातिर एक ख़ाना छोड़ दे,

मैक़दों में आना जाना भूल कर,
हंस ज़रा दिल का जलाना छोड़ दे,

क्यूँ रहे खुशियों से यूँ महरूम तू,
होश में आ लड़खड़ाना छोड़ दे,

ग़म है अव्वल,ज़िन्दगी की राह में,
इसलिए ख़ुद को सताना छोड़ दे,

एक तू क्या हर कोई हलकान है,
मान भी जा अब बहाना छोड़ दे,

चश्म-ए-गिरयाँ ऑ कलेजा तर-ब-तर,
चाक़ दामन ,सब गिनाना छोड़ दे,

ग़म ग़लत कर जा कहीं तन्हाई में,
जा-ब-जा,ग़म का सुनाना छोड़ दे,

ग़र यूँ ही रोना है तो जी भर के रो,
ऐसा कर शम्मा जलाना छोड़ दे,

या के फिर तू बात मेरी मान ले,
मुफ्त के सदमे उठाना छोड़ दे...
#उर्मिलामाधव...
27.1.2o16

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