ग़ज़ल

चिलमन दरूं गिरा के किया आपने गुनाह,
इस बे-अदब अदा का भला क्या करेंगे आह !!,

इन फासलों के साथ ही चलना है गर हमें,
किसकी करेंगे आरज़ू,किसकी तकेंगे राह,

करने से पहले आपने सोचा तो होगा खूब,
हरक़त को आफरीं है,अदावत की वाह-वाह !!

इसके हुए ये मानी के उल्फत हुयी तमाम,
अब देखनी है आपकी बदली हुयी निगाह,

हमको किया अमीर भी इफरात से जनाब,
रख्खेंगे अब सहेज के ये आह और कराह,
उर्मिला माधव...
11.1.2014..

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