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Showing posts from July, 2018

बुंदेली भाषा

ऐसे ही एक कोशिश 😊😊😊😊😊 जे कैसौ बतरानौ भओ, समझे नईयाँ?तानौ भओ, बो जो चित्र लगायौ तुमने, बाखौं एक जमानौ भओ, बो तौ हती धरोहर तौ फिर, महफिल में चों लानौ भओ ? उर्मिला माधव.. 1.8.2016

मां का कलाम

हे ईश आज है स्वर्ण दिवस गुरुदेव कमल पग धारे है, या उदय हुए हैं पूण्य पुंज चमके सौभाग्य सितारे हैं शत कोटि सूर्य से भी बढ़कर हे नाथ आप उजियारे हैं, तम हर लें चंदा देवी का क्यूँ दय...

दरिया का पानी

रेत के पन्नों पै लिख्खी है कहानी, एक तरफ दरिया का पानी, एक तरफ कुछ जिंदगानी, एक तरफ दुनियाँ-ए-फ़ानी, एक तरफ कुछ नातवानी, एक तरफ हुस्न-ओ-जवानी, एक तरफ बस लनतरानी, एक तरफ शामें सुहान...

फ़क़ीर

सब ही ख़ुद को फ़क़ीर कहते हैं, शह्र में रंग-ओ-समां फिर किसलिए ? बिन दर-ओ-दीवार ही सब रहते हैं, दह्र में इतने मकां फिर किसलिए ? #उर्मिलामाधव... 30.7.2915

ख़राब कर डाला

वक़्त कितना ख़राब कर डाला, ख़ुद को ख़ुद ही हबाब कर डाला, तंज़ करना भी एक नशा ही है, सबको नाहक़ जवाब कर डाला, आग कितनी जिगर में रखते थे, जाने क्या-क्या हिसाब कर डाला, ज़िन्दगी उनकी तल्ख़ है ...

फ्री वर्स अलग हो न

तुम कितने अलग हो ना ? बिछड़ जाते हो कितनी आसानी से... और मैं देखती रह जाती हूँ तुमको हैरानी से, मैंने पसीने की बूंदों के साथ, तुमको भी पोंछ दिया पेशानी से, ये बूंदें बहुत परेशान करत...

फ़क़ीर कहते हैं

सब ही ख़ुद को फ़क़ीर कहते हैं, शह्र में रंग-ओ-समां फिर किसलिए ? बिन दर-ओ-दीवार ही सब रहते हैं, दह्र में इतने मकां फिर किसलिए ? सब मुहब्बत का ग़म ही सहते हैं, क़ह्र में तीर-ओ-कमां फिर किसलि...

महदूद कर लिए

अब हमने दिल के दायरे महदूद कर लिए, रंज-ओ-अलम ही मंज़िल-ए-मक़सूद कर लिए रुसवाइयों के ज़िक्र पे जो कुछ भी होगया, वो ग़म अना के नाम पर ,महमूद कर लिए, ख्वाहिश तरह-तरह की,हज़ारों तरह के ख़्वाब...

फ्री वर्स

टूट जाते हैं, घने रिश्ते, बेईमानी की चौखट पर, दुनियां गोल है, घूमती रहती हैं, वार्ताएं, दरकती रहती हैं, वर्जनाएं, खिसकती रहती हैं, आस्थाएं, उलझती रहती हैं, चेष्टाएँ, सिसकती रहत...

मैंने कुछ कहा ?

अच्छा बताओ मैंने कभी तुमसे कुछ कहा ? जो भी कहा वो तुम ने कहा मैंने बस सहा, मैं उम्र भर रही हूँ इन्हीं रंज-ओ-ग़म के साथ, सैलाब दुश्मनों का ......मेरे संग ही संग रहा, खुशियाँ तुम्हें मिली...

तुमको क्या बताना

आपस का मामला है गैरों को मत जताना, वो दिन कभी न लाना...हंसने लगे ज़माना ..... हम-तुम तो एक ही हैं,गैरों से कैसी निस्बत, मालूम तुमको होगा,लो तुमको क्या बताना... उर्मिला माधव....

मरहूम कलाम साहब के नाम

आली जनाब मरहूम कलाम साहब के नाम----- ----------------------------------------- एक दिन जाना सभी को है मगर, तेरा जाना किस क़दर है पुर असर!! शख्सियत के चाँद तारे,तुझमें थे, दर्द कितने दे गया तू बे-ख़बर, हर कोई खुद को ही फन्ने ...

उंसियत

झूठ है झूठे जहाँ की उंसियत, इसमें सब हारे उलट कर देख ले, क्या बताएं चश्मे तर का माज़रा, वक़्त के धारे उलट कर देख ले, इक से बढ़कर एक तीरंदाज़ थे, मक़बरे सारे उलट कर देख ले.. उर्मिला माधव.. 28.7.20...

अम्मा ही कहती थीं --नज़्म

फ़क़त इक लफ्ज़ था 'लाड़ो', जो बस अम्मा ही कहती थीं, खुशी हो,ग़म हो,कुछ भी हो हमेशा ........साथ रहती थीं, अगर तक़लीफ़ ....हम पर हो, तो ....आँखें उनकी बहती थीं, फ़क़त इक लफ्ज़ था "लाड़ो" सो बस अम्मा ही कहती थीं, उर...

अच्छा है

खुद ही खुद में दिल बहलाना अच्छा है, कभी-कभी का चुप रह जाना अच्छा है, हद से ज़्यादः बात गुज़रना ठीक नहीं, कभी-कभी अहसान जताना अच्छा है, बहुत शराफ़त,इल्ज़ामों की बाइस है, कभी-कभी तूफ़ान ...

है भी नहीं भी है

न जाने क्या है वो अहसास सा इस जिस्म में,है भी,नहीं भी है, न जाने क्या है कुछ हस्सास सा इस जिस्म में,है भी,नहीं भी है, बड़े ही फ़ख़्र से करते हैं इस्तेमाल ये कह कर हमारा है, न जाने क्या ह...

नहीं लगता

कोई हो दिल अगर अहसास से ख़ाली तो वो अच्छा नहीं लगता, तबस्सुम ग़र किसी चेहरे पे हो जाली तो वो अच्छा नहीं लगता, चमकते चांद से चेहरे के क्या मानी अगर फितरत फ़रेबी हो, किसी दिल की अगर त...

नज़्म--- हमारी हवेली

बहुत खूबसूरत थी दिल की हवेली, इसी में छुपी है हमारी सहेली, कभी इसकी ख्वाहिश हवाओं में उड़ना, दरख्तों की शाखों पै चढ़ना उतरना, हवाओं की सरगम पे गाना ठुमकना ऑ नदिया की हलचल पे जी भ...

एक दिन जाना सभी को है मगर--

Jul 29, 2015 10:02am आली जनाब मरहूम कलाम साहब के नाम----- ----------------------------------------- एक दिन जाना सभी को है मगर, तेरा जाना किस क़दर है पुर असर!! शख्सियत के चाँद तारे,तुझमें थे, दर्द कितने दे गया तू बे-ख़बर, हर कोई खुद को ही फ...

देख ना

मेरे साकी शोखिये रिन्दाना आकर देख ना, बे-अदब हाथों में है पैमाना,आकर देख ना,.... आ ज़रा बस रंग-ए-महफिल देखने के वास्ते, हर सलीकेमंद का चिल्लाना,आकर देख ना, हर कोई मैकश का जामा ओढ़ कर झ...

दुल्हन--- नज़्म

सुर्ख़ जोड़े में सजा कर एक दुलहन भेज दी ज़िंदगी से खेलने को फूलों वाली सेज दी उसकी सारी गुड्डियाँ,सारे पटोले छीन कर उसकी दुनियाँ से ख़ुशी की सारी कलियाँ बीन कर सिर्फ़ तोहफ...

आज चला है मुझको

इश्क़ का दायरा एक ख़ास बला है मुझको, इससे बढ़के तो कहीं आज ख़ला है मुझको... सांप अपनी हदों में खुश मिजाज़ होते हैं, इसके बाबत भी पता आज चला है मुझको... -------------------------------------------- ishq kaa dayraa ek khaas balaa hai mujhko, isse badhke to kahin aaj khalaa hai mujhko... saanp apnii hadon main khush mijaaz hote hain, iske baabat bhii pataa ...

बद से बद्तर हो गए

वक़्त और हालात कितने, बद से बद्तर हो गए, क़ातिलाना हादिसे ही .......रंग-ए-मंज़र हो गए, सोचती हूं आदमी की ज़ात को क्या हो गया, ख़ून में डूबे हुए सब तीर -ओ-खंजर हो गए, अब तुम्हीं से पूछती हूँ,अय ज़...

झींकता क्यों है

चार मिसरे डायरी से----- चमन में,फाख्ताएं,बुलबुलें,और खुशबुएँ भी हैं, वो आख़िर चाहता क्या है,हवा में चीख़ता क्यूँ है ?? मुहब्बत के हंसीं जलवे,शह्र के ख़ूब रु मंज़र, उसे सब कुछ मुहैया है,...

ज़िक्र अंधेरी रात का..

नज़्म भीगे पत्ते, शाखें भीगी मौसम है बरसात का ज़िक्र अँधेरी रात का है ज़िक्र अँधेरी रात का, कभी हवा के झोंके खाकर,खिड़की घर की खुल जाए, दिल की दुनियाँ हिल जाए और अपने आप संभल जाए, खड़...

बिखर रही हूं

खुली बग़ावत है ज़िन्दगी से, मैं धड़कनों से मुकर रही हूं, के अब न भाती हैं सर्द आहें, मैं सब दहानों से डर रही हूं, यूँ रूह कहती है अब तड़प के, हज़ारों सदियों से मर रही हूं, ये जिस्म जैसे ल...

परस्तार कर गए

उफ़ ज़िन्दगी के मरहले बीमार कर गए, ऐसा लगा कि ग़म का परस्तार कर गए, दामन में सिर्फ खार हैं.....पैरों में आबले, रस्ता बहुत कठिन था मगर पार कर गए , कुछ आरज़ू थी...कुछ थे इरादे बहुत बड़े , कुछ रा...

हासिल न था

एक तो हरगिज़ हमें रहबर तलक़ हासिल न था, उस पै कुछ तेरा सहारा भी महे-क़ामिल न था, रात को एक बज़्म में शिरकत हमारी थी ज़रूर, जाने क्यों ऐसा लगा के हम वहीँ थे,दिल न था, बारहा कई रंग हमसे, ख़ूब ...

रह गए

उनको देखा......देखते ही रह गए, ओर उनसे बात दिल की कह गए, इस क़दर शफ्फाक़ थे ओर खूबरू, झिलमिलाती चांदनी थी, बह गए, ये नहीं मालूम,दिल का क्या हुआ, साथ अपने बेख़ुदी थी, सह गए, उनका रंग-ओ-नूर था य...

ब्लॉक- व्लाक करदूँ क्या

मैं उसे ब्लॉक-व्लोक कर दूँ क्या ? ज़िन्दगी भर को लॉक करदूं क्या ? उसकी बातों का रंग गाली है, मैं भी कुछ लूज़ टॉक करदूं क्या ? बात कहना मुझे भी आता है, उसकी आवाज़ चौक करदूं क्या ? #उर्मिल...

करम नहीं साहिब

ग़म तो हमको भी कम नहीं साहिब, वक़्त सा पर मरहम नहीं साहिब, रख के ज़ानूं पे सर को,रोया करें, इतने कमज़ोर हम नहीं साहिब, मुश्किलें हर नफ़स मुक़ाबिल हैं, आंख उस पर भी नम नहीं साहिब, हमको मग़...

हार गए

हार गए हम हार गए ,जीवन की बाज़ी हार गए, तन थका हुआ मन थका हुआ जीवन की डगर थकी सी है, वो थके दिखाई देते हैं पल अभी-अभी जो चार गए, निज व्यथा कही ना जाती है,सुनकर दुनियाँ इठलाती है, किस ड...

परीक्षा छोड़ दोगे ?

जो मिली गुरु से तुम्हारे,क्या वो दीक्षा छोड़ दोगे?? और किसी परिणाम के भय से परीक्षा छोड़ दोगे?? है समर जीवन भयंकर,साथ कंटक पथ निरंतर, किन्तु क्या प्रारब्ध के भय से प्रतीक्षा छोड़ ...

हवा भी चला दो

शमा भी जला दो, हवा भी चला दो, ऑ दोनों को बढ़कर बहुत हौसला दो, के ख़ामोश रह कर,तमाशाई हो कर, यूँ मजमें को अंजाम तक सिलसिला दो उर्मिला माधव... 22.7.2016

छोटा सा है

चल रे पगले तू अभी छोटा सा है, बाज़ुओं के घेर में बच्चा सा है, तू बहुत प्यारा सा है ये सच तो है, पर दिमाग़ी तौर पर, नन्हा सा है तेरा क़द दस फ़ीट लंबा है तो क्या, पर समझ में तू बहुत कच्चा सा ह...

बन कर चले

इस ज़मी पर आसमां बन कर चले, हम अकेले "कारवां"बन कर चले... जो भी जी में आगया सच कह दिया, अपने हर्फ़ों की जुबां बन कर चले, यूँ समझ लो मील का पत्थर भी ख़ुद, और ख़ुद ही पासबां बन कर चले, मर्सिया ...

गराँ से

एक शख़्स जो गुज़रा है अभी दौर-ए-गराँ से, तकता है उसी राह को ....हम आए कहाँ से ? भारी है बहुत जिस्म मगर ये तो हो मुमकिन, हल्की सी रहे जान .....जब ये जाए जहां से, उर्मिला माधव, 21.7.2017

रह गए हैं

हम मुहब्बत के ग़म सह गए हैं, अश्क आंखों में कम रह गए हैं, ये भी आख़िर बताते,कहाँ तक, आधे-आधे से हम रह गए हैं, उर्मिला माधव 20.7.2018

हासिल न था

एक तो हरगिज़ हमें रहबर तलक़ हासिल न था, उस पै कुछ तेरा सहारा भी महे-क़ामिल न था, रात को एक बज़्म में शिरकत हमारी थी ज़रूर, जाने क्यों ऐसा लगा के हम वहीँ थे,दिल न था, बारहा कई रंग हमसे, ख़ूब ...

सच भी नहीं

झूठ कुछ भी नहीं और सच भी नहीं, जो भी है तू ही है,मैं तो कुछ भी नहीं, तेरे हाथों बनी एक तस्वीर हूँ, तेरे हाथों लिखी एक तहरीर हूँ, मिल्कियत हूँ तिरी,तेरी जागीर हूँ, दह्र में तेरे जल्...

सावन अच्छा लगता है

यूँ तो सब कुछ तितर-बितर और बिखरा लगता है मुझको अपना सावन फिर भी अच्छा लगता है, फूलों पर ,पत्तों पर जो भी,ओस की बून्दें गिरती हैं, रोज़ाना आपस में मिलकर कितनी बातें करती हैं, मन के ...

निकलते रहिये

जीने की ग़र ख्वाहिश है तो,शोलों पर भी चलते रहिये, सूरज की मानिंद जहाँ में,बस हर रोज़ निकलते रहिये, -------------------------------------------------------------------- jiine kii gar khwahish hai to sholon par bhii chalte rahiye, sooraj kii maanind jahaan main bas har roz nikalte rahiye... उर्मिला माधव... 19.7.2014..

रिंदाना आकर देख ना

मेरे साकी शोखिये रिन्दाना आकर देख ना, बे-अदब हाथों में है पैमाना,आकर देख ना,.... रंग-ए-महफिल देखने के वास्ते ही आ ज़रा, हर सलीकेमंद का चिल्लाना,आकर देख ना, हर कोई मैकश का जामा ओढ़ कर झ...

मिल गई देखो

दुनियां ग़ैरों से मिल गई देखो, घर की बुनियाद हिल गई देखो, शब की औक़ात कितनी छोटी थी, ज़ख्म कितनों के सिल गई देखो.. ख़ूब शिद्दत से दिल को थामे रहे, फ़िर हथेली भी छिल गई देखो, एक ही दिन तो ग़...

शाया करके आ गए

भीड़ में इक मजमुआं हम शाया करके आगए, जाने क्यूं ऐसा लगा सब ज़ाया करके आगए, दिल ही दिल में हमको ये महसूस सा होता रहा, ख़र्च बस अल्फ़ाज़ का सरमाया करके आ गए.... उर्मिला माधव...

हद सी हो गई

सा'ब ये तो हद सी होगई, दिल्लगी सनद सी होगई, बोलने का ये सिला हुआ, बात ही अहद सी हो गई, गुफ़्तगू सियासती भी अब, रोज़ की रसद सी होगई, हारने को और क्या बचा?? बे-ख़ुदी खिरद सी होगई, रोज़-ए-अज़ल गि...

गाना भी चाहें, नचाना भी चाहें😊

अदावत में वो होगये हैं दिवाने,दिखाना भी चाहें,छुपाना भी चाहें, मुहब्बत के हमने लिखे जो तराने,वोगाना भी चाहें,न गाना भी चाहें , वो कितनी मशक्क़त किये जा रहे हैं,बिना बात रस्सी स...

इज़्ज़त क्यों उछाली जाए

जान सांसत में न डाली जाए, हर जतन करके बचा ली जाये, जब अंधेरों से खौफ़ लगता हो, इक नई शम्मा जला ली जाये, तू मेरा दोस्त है कोई गैर नहीं, तेरी इज्ज़त क्या उछाली जाए, मील के पथ्थरों से उल...

साथ तो नहीं रहना---

मेरा अब लौटना नहीं होगा, जाने मैं कितनी बार लौटी हूँ, अब शिकायत ही कुछ नहीं तुमसे, बार बार टूटने और जुड़ने से, अनगिनत हो गईं हैं गांठें अब, दूर रहने से ठीक रहता है, ग़म अगर कुछ हुआ त...

कहो

जीते ही चले जाने का मतलब है क्या,कहो, रह-रहके छले जाने का मतलब है क्या,कहो, बेबाक़ हो रहो के कहो खुल के दिल की बात, घुट-घुटके जले जाने का मतलब है क्या,कहो, उगना सुबह-सुबह औ सुलगना तम...

रब्बा क़सम

मैं समझती थी उन्हें अच्छा सनम, पर बुरे हैं वो बहुत, रब्बा क़सम... चाहे जो कुछ पूछती रह जाऊँ मैं, हंस दिए बस हो गया किस्सा ख़तम, है ये मुमकिन दिल में कोई और हो, ये अगर सच है तो होगा कितना ...

रख्खा गया

ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा बिलकुल जुदा रख्खा गया, आदमी का आदमी से सिलसिला रख्खा गया, ज़ीस्त में कुछ इस तरह रंगीनियाँ रख्खी गईं, जिसमें इंसानों को हरदम मुब्तिला रख्खा गया, बुत बनाया पथ...