छोटा सा है
चल रे पगले तू अभी छोटा सा है,
बाज़ुओं के घेर में बच्चा सा है,
तू बहुत प्यारा सा है ये सच तो है,
पर दिमाग़ी तौर पर, नन्हा सा है
तेरा क़द दस फ़ीट लंबा है तो क्या,
पर समझ में तू बहुत कच्चा सा है,
यूँ तो है अतराफ़ में हर वक़्त ही,
पर पहाड़ों से गिरा झरना सा है,
तेरी हर ख़्वाहिश पे रहतीं है नज़र,
तू मुहब्बत में मेरी बिगड़ा सा है...
उर्मिला माधव...
22.7.2017
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