शाया करके आ गए

भीड़ में इक मजमुआं हम शाया करके आगए,
जाने क्यूं ऐसा लगा सब ज़ाया करके आगए,

दिल ही दिल में हमको ये महसूस सा होता रहा,
ख़र्च बस अल्फ़ाज़ का सरमाया करके आ गए....
उर्मिला माधव...

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