गाना भी चाहें, नचाना भी चाहें😊
अदावत में वो होगये हैं दिवाने,दिखाना भी चाहें,छुपाना भी चाहें,
मुहब्बत के हमने लिखे जो तराने,वोगाना भी चाहें,न गाना भी चाहें ,
वो कितनी मशक्क़त किये जा रहे हैं,बिना बात रस्सी से बल खा रहे हैं,
मेरे लफ्ज़ क्या हैं कि बस देखने को,वो आना भी चाहें,न आना भी चाहें,
वक़ालत की आधी अधूरी पढ़ाई,मुहब्बत में बतलाओ कब काम आई,
वो गरदान लिखकर हँसे जा रहे हैं,जमाना भी चाहें, नचाना भी चाहें,
उर्मिला माधव....
17.7.2014...
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