साथ तो नहीं रहना---
मेरा अब लौटना नहीं होगा,
जाने मैं कितनी बार लौटी हूँ,
अब शिकायत ही कुछ नहीं तुमसे,
बार बार टूटने और जुड़ने से,
अनगिनत हो गईं हैं गांठें अब,
दूर रहने से ठीक रहता है,
ग़म अगर कुछ हुआ तो मेरा है,
तुमसे कहने भी अब नहीं जाती,
बस धुंधलके में बाहर आती हूँ,
थकतीआँखों से देख जाती हूँ,
किसने किस रंग का दिया है ग़म,
झोलियां भर के लौट आती हूँ,
लौटना क्यूँ हो ख़ाली हाथों से,
जितनी चीजें हैं सब हमारी हैं,
कुछ तेरे ग़म की तरहा भारी हैं
इसलिए सोचती हूँ अब ऐसे,
तुम न बदलोगे बात पक्की है,
इसलिए मैं ही मैं बदल जाऊं,
तुमको देखूं मैं और निकल जाऊं...
अलविदा उम्र भर नहीं कहना,
फिर भी अब साथ तो नहीं रहना...
उर्मिला माधव...
17.7.2015
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