फ़क़ीर

सब ही ख़ुद को फ़क़ीर कहते हैं,
शह्र में रंग-ओ-समां फिर किसलिए ?

बिन दर-ओ-दीवार ही सब रहते हैं,
दह्र में इतने मकां फिर किसलिए ?
#उर्मिलामाधव...
30.7.2915

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