दरिया का पानी
रेत के पन्नों पै लिख्खी है कहानी,
एक तरफ दरिया का पानी,
एक तरफ कुछ जिंदगानी,
एक तरफ दुनियाँ-ए-फ़ानी,
एक तरफ कुछ नातवानी,
एक तरफ हुस्न-ओ-जवानी,
एक तरफ बस लनतरानी,
एक तरफ शामें सुहानी,
एक तरफ कुरआन ख़ानी,
रेत के पन्नों पै लिख्खी ये कहानी,
सारी दुनिया है फ़क़त आनी ऑ जानी...
उर्मिला माधव...
31.7.2014...
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