फ्री वर्स
टूट जाते हैं,
घने रिश्ते,
बेईमानी की चौखट पर,
दुनियां गोल है,
घूमती रहती हैं,
वार्ताएं,
दरकती रहती हैं,
वर्जनाएं,
खिसकती रहती हैं,
आस्थाएं,
उलझती रहती हैं,
चेष्टाएँ,
सिसकती रहती हैं,
भावनाएं,
जब सर उठाती रहती हैं
अति महत्वाकांक्षाएं,
जहां अति,
वहां इति....
उर्मिला माधव,
30.7.2017
Comments
Post a Comment